भारत की वो 5 भयानक त्रासदियां, जिसे लोग आज तक भूले नही है

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हमारा भारत देश विभिन्न संस्कृतियों से भरा है. जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं और त्योहार मनाते हैं. इस देश की यही विशेषता है कि समय आने पर सब एक दूसरे के साथ खड़े हो जाते हैं. भारत के इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले है. मुश्किल वक्त में जहां लोग अपनों से बिछड़ गए वहीं दूसरे लोग एक-दूसरे के करीब भी आ गए. आजादी के बाद देश में कई बार तबाही का मंजर देखने को मिला. इसके बाद देश और भी ज्यादा मज़बूत के साथ खड़ा हुआ.

कई घटनाएं ऐसी होती हैं जो सुर्खियां बन जाती हैं जिसमें कई लोग अपने परिवार के सदस्यों को खो देते हैं. लेकिन इन सबमें एक चीज कॉमन है और वह है इंसानियत. आज के इस लेख में हम आपको भारत की उन 5 भयानक तबाही के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें सोचकर आज भी रूह कांप जाती है.

Those 5 terrible tragedies of India, which people have not forgotten till date

भारत की वो 5 भयानक त्रासदियां

भारत की वो 5 भयानक त्रासदियां जिन्हें याद कर आज भी हिंदुस्तान के लोगो की आँखों में आंसू आ जाते है वो सभी निम्न है-

जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)

13 अप्रैल 1919 का वह काला दिन जिसे देश आज तक नहीं भुला पाया है. यह घटना इतिहास के पन्नों में इस तरह से जुड़ गई कि लोग चाहकर भी इसे भूल नहीं पाते. 13 अप्रैल 1919 के दिन दो राष्ट्रवादी नेता डॉ. सैफुद्दीन किचलू और सत्य पाल की गिरफ्तारी हुई. इसके बाद जलियांवाला बाग (jallianwala bagh massacre in hindi) में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया. इतनी अधिक संख्या में लोगो को देखकर ब्रिटिश मिलिट्री ऑफिसर जनरल डायर अचानक अपनी आर्मी के साथ जलियांवाला बाग में चले गये. बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग वहां मौजूद थे, किसी को नहीं पता था कि उनके साथ क्या होने वाला है. जनरल डायर ने लोगों को बिना कोई आदेश और चेतावनी दिए अपने सैनिकों को 10 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग करने का आदेश दिया. इस फायरिंग में कुछ ही मिनटों में हज़ारों लोगो की मौत हो गई. जलियांवाला बाग की दीवारों पर आज भी इस नरसंहार के निशान देखे जा सकते हैं. अब यहाँ राष्ट्रीय तीर्थस्थल बन गया है. इस घटना का बदला उधम सिंह ने 21 साल बाद 1940 में लिया. रिटायर्ड डायर 13 मार्च को लंदन के कैक्सटन हॉल पहुंचा जहां उधम सिंह भी मौजूद थे. जब डायर स्टेज पर भाषण देने आया तो उधम सिंह ने गोली चला दी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

भोपाल गैस त्रासदी (1984)

2 दिसंबर, 1984 की वो रात जब भोपाल के लगो सो तो गए लेकिन फिर वापिस कभी जागे नहीं. 2 दिसंबर की रात से ही भोपाल की हवा जहरीली होने लगी और 3 दिसंबर होते ही पूरे भोपाल (bhopal disaster in hindi) की हवा जहरीली हो गई और लोगों के लिए घातक हो गई. हवा का जहरीली होने का कारण था मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का लीक होना और यह गैस एक यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से निकली थी. फैक्ट्री के आसपास की झुग्गियों में सो रहे लोगों की नींद में ही मौत हो गई और जब गैस और फैलने लगी तो लोगों को उल्टी और घबराहट होने लगी. लोगों की हालत इतनी खराब थी कि कई लोगों की रास्ते में ही मौत हो गई तो कुछ की हांफते-हांफते ही जान चली गई. किसी को चक्कर आ रहा था तो किसी को साँस लेने में दिक्कत हो रही थी. रोड पर लाशो का मंज़र हो गया था. अस्पताल में इलाज के लिए 50 हजार से ज्यादा लोगों की कतार लग गई. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस त्रासदी में 3,787 लोगों की मृत्यु और 5.74 लाख से अधिक लोग घायल हो गये. इनमे से कुछ तो अपंग भी हो गये थे. जबकि सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार 15,724 लोगों मौत हो गई थी. इस पुरे भोपाल कांड का दोषी कंपनी का CEO वॉरेन एंडरसन को बताया जाता है. उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था, फिर बाद में उन्हें सरकारी विमान से दिल्ली भेजा गया, जहां से वे अमेरिका के लिए रवाना हुए. साल 2014 में उनका निधन हो गया है.

गुजरात भूकंप (2001)

साल 2001 और 26 जनवरी का वो दिन जब पूरा देश गणतंत्र दिवस बनाने के लिए उठा था. उस दिन किसी को क्या पता था कि गुजरात का भयानक मंज़र देखने को मिलेगा. 26 जनवरी की सुबह 08 बजकर 46 मिनट पर भीषण भूकंप आया. और यह भूकंप 7.7 की तीव्रता के साथ कच्छ और भुज में आया. गुजरात के 21 जिलों सहित 700 किलोमीटर के एरिया में इसके झटके महसूस किये गये. इस भूकंप का ज्यादा असर कच्छ के भचाऊ में अधिक देखने को मिला. कच्छ और भुज में इस विनाशकारी भूकंप से 30 हज़ार से अधिक लोगो की मौत हो गई. और करीब 1 लाख 50 हज़ार से ज्यादा लोग घायल हो गये. और लगभग 4 लाख से ज्यादा घर पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गये. सिर्फ भुज में 40 प्रतिशत मकान, दो अस्पताल, 8 स्कूल और करीब 8 किलोमीटर तक की सड़के पूरी तरह से तबाह हो गई. और 6 लाख लोग बेघर हो गये. इसका असर पड़ोसी देश पाकिस्तान में देखने को मिला. गणतंत्र दिवस होने की वजह से अधिकतर तो घरों में थे.      

उत्तराखंड बाढ़ (2013)

उत्तराखंड में 13 से 17 जून के बीच झमाझम बारिश हुई. कहा जाता है कि यह बारिश औसत से कहीं ज्यादा थी. इसी बीच चौराबाड़ी ग्लेशियर पिघलने लगा, जिससे मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने लगा. और देखते ही देखते बारिश ने विकराल रूप ले लिया. इस विकराल रूप ने सड़कें उखाड़ दी और लोगों की जिंदगियां पानी में बह गई. चारो तरफ तबाही का मंज़र था. केदारनाथ मंदिर पूरा तेज़ बारिश से लबालब हो गया. जैसे-जैसे बारिश तेज होने लगी, जगह-जगह भूस्खलन होने लगे, पूल टूटने लगे और रास्ते बंद हो गए. मंदिर परिसर में ठहरे लोग डूबने लगे. इस बाढ़ में 10 हज़ार से अधिक लोगो की मौत हो गई थी. हज़ारो घायल हो गये और लापता हो गये. और करीब 3 लाख श्रद्धालु फंस गए थे. बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए हजारों सैनिक सहित स्थानीय लोग और स्वयंसेवक आये. पीड़ितों को हेलीकॉप्टर से भोजन, पानी, कपड़े और अन्य चीजें मुहैया कराई गई.   

मुंबई आतंकी हमला (2008)

26 नवंबर (2008 Mumbai attacks) का दिन जहां मुंबई की सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही और भागदौड़ के साथ भारी जनजीवन चल रहा था. बच्चे अपने माता पिता के साथ घूम रहे थे और गेटवे ऑफ इंडिया के आसपास पर्यटक अपनी अपनों फोटो खिंच रहे थे. कुछ ही देर में ताजमहल पैलेस होटल से धुआं निकलने लगा और गोलियों की आवाज आने लगी. वहां मौजूद लोगों की समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है. समुद्री मार्ग से लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी मुंबई पहुंचे और ताज होटल, नरीमन हाउस, ओबेरॉय ट्राइडेंट, लियोपोल्ड कैफ़े, कामा अस्पताल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस में हमला किया. ताज होटल में तो कई विस्फोट भी हुए और कई लोगो को मार दिया और 4 दिनों तक कुछ लोगो को बंधक बनाया. 26/11 के मुंबई हमले (26/11 Mumbai Attack) से पूरा देश हिल गया था. इस हमले में 164 लोग मारे गए और 600 से ज्यादा लोग घायल हुए. इस हमले में 9 आतंकी मारे गए थे लेकिन एक आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब पकड़ा गया था. जिसे 21 नवंबर 2012 को फांसी दी गई.

निष्कर्ष – आज के इस लेख में हमने आपको बताया भारत की 5 भयानक तबाही के बारें में बताया. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी. अगर आपका कोई सुझाव है तो कमेंट करके जरूर बताइए. अगर आपको लेख अच्छा लगा हो तो रेटिंग देकर हमें प्रोत्साहित करें.

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