खाशाबा दादासाहेब जाधव का जीवन परिचय | Khashaba Dadasaheb Jadhav Biography In Hindi

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सर्च इंजन गूगल ने 15 जनवरी रविवार को दुनिया के सबसे महान पहलवानों में से एक खशाबा दादासाहेब जाधव को उनके 97वें जन्मदिन पर एक विशेष डूडल बनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की. भारत के दिग्गज पहलवान केडी जाधव को फ़िनलैंड का शहर हेलसिंकी में साल 1952 के समर ओलंपिक में ओलंपिक पदक जीतने वाले अकेले भारत के पहले व्यक्तिगत एथलीट के रूप में याद किया जाता है. हर साल की भांति इस साल भी गूगल ने अपने अनोखे अंदाज़ में केडी जाधव को याद किया. कुश्ती में अपनी एक अलग पहचान बनाकर दुनिया में भारत का नाम करने वाले खाशाबा जाधव ने अपनी उम्र अपने से बडें कुश्तीबाजों को हराया था.

तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको भारत के दिग्गज पहलवान खाशाबा दादासाहेब जाधव  का जीवन परिचय (Khashaba Dadasaheb JadhavBiography In Hindi) के बारें में विस्तृत जानकारी देने वाले है.

Khashaba Dadasaheb Jadhav Biography In Hindi

खाशाबा जाधव का जीवन परिचय (Khashaba Dadasaheb Jadhav Biography In Hindi)

नाम (Name) खाशाबा जाधव (Khashaba Dadasaheb Jadhav)
पूरा नाम  (Full Name) खाशाबा दादासाहेब जाधव 
निक नाम (Nickname) पॉकेट डायनेमो, केडी
जन्म तारीख (Date of birth) 15 जनवरी 1926
जन्म स्थान (Place) सतारा जिला, मुंबई, महाराष्ट्र
होमटाउन (Hometown) गाजीपुर, उत्तरप्रदेश, भारत
उम्र (Age) 58 साल (मृत्यु के समय)
मृत्यु की तारीख (Date of Death) 14 अगस्त 1984
मृत्यु की जगह (Place of Death) करड ,महाराष्ट्र , भारत
मृत्यु की वजह (Reason of Death) सड़क दुर्घटना
धर्म (Religion) हिन्दू
प्रसिद्द (Famous for ) स्वतंत्र भारत के पहले एथलीट और ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक विजेता
पेशा  (Profession) भारतीय एथलीट और पहलवान
कद (Height) 5 फीट 6 इंच
वजन (Weight) 54 किलोग्राम
रोल (Role) फ्रीस्टाइल कुश्ती
कोच (Coach) रीस गार्डनर
अवार्ड का नाम (Award Name) अर्जुन पुरस्कार
अवार्ड कब मिला 2000
नागरिकता(Nationality) भारतीय
राशि (Zodiac Sign) कन्या
भाषा (Languages) हिंदी, इंग्लिश
वैवाहिक स्थिति (Marital Status) वैवाहिक

कौन थे खाशाबा दादासाहेब जाधव  (Who was Khashaba Dadasaheb Jadhav)

खशाबा दादासाहेब जाधव एक भारतीय एथलीट और एक पहलवान थे. जिन्होंने हेलसिंकी में साल 1952 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. वह ओलंपिक में पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीटों में से एक थे. कुश्ती में अपनी तेज गति के कारण केडी जाधव को दुनिया के अन्य पहलवानों से अलग बनाया गया था. इंग्लिश कोच रीस गार्डनर ने उनमें पहलवानी के दावपेंच देखे और साल 1948 के ओलंपिक खेलों से पहले उन्हें ट्रेनिंग देना शुरू किया. महाराष्ट्र में जन्मे जाधव ने अपने कुश्ती करियर की शुरुआत साल 1948 में की थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार लाइमलाइट में आए साल 1948 के लंदन ओलंपिक में. साल 2010 में, जाधव के सम्मान में नई दिल्ली में इंदिरा गांधी खेल परिसर में एक कुश्ती स्थल का नाम रखा गया था. कुश्ती में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2000 में मरणोपरांत अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

खाशाबा दादासाहेब जाधव  का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन (Khashaba Dadasaheb Jadhav Birth and Early Life)

खशाबा जाधव जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गाँव गोलेश्वर में 15 जनवरी, 1926 में हुआ. इनके पिता पहलवान दादासाहेब जाधव थे और खशाबा पांच बेटों में सबसे छोटे बेटों थे. उन्होंने 1940 और 1947 के बीच सतारा के कराड तालुका में तिलक हाई स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. जाधव का बचपन कुश्ती के बीच बीता और उन्होंने बचपन से ही खेल के गुर देखना और सीखना शुरू किया. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इन्होने कुछ क्रांतिकारियों को रहने और छिपाने में मदद की दी और इस आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ पेपर बांटने का भी योगदान था. 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस के दिन उन्होंने ओलम्पिक में तिरंगा झंडा फहराने की शपथ ली.

खाशाबा जाधव का कुश्ती करियर (Khashaba Dadasaheb Jadhav Career)

  • खशाबा को उनके पिता दादासाहेब ने पांच साल की उम्र में कुश्ती से परिचित कराया था. कॉलेज में, बाबूराव बलावडे और बेलापुरी गुरुजी ने उनके कुश्ती ट्रेनर के रूप में काम किया. कुश्ती में अपनी उपलब्धियों के कारण इसने उसे अच्छे अंक प्राप्त करने से नहीं रोक पाए. भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा रहे और 15 अगस्त, 1947 को ओलंपिक में तिरंगा झंडा फहराने का फैसला किया.
  • खशाबा ने साल 1948 में अपने कुश्ती करियर की शुरुआत की, और उन्हें पहला बड़ा ब्रेक साल 1948 के लंदन ओलंपिक में मिला, जहां उन्होंने फ्लाईवेट डिवीजन में छठा स्थान हासिल किया. साल 1948 तक, वह व्यक्तिगत श्रेणी में इतना ऊंचा स्थान पाने वाले पहले भारतीय थे. खशाबा का छठा स्थान हासिल करना उस समय कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी, इस बात के बावजूद कि वह मैट कुश्ती और कुश्ती के अंतरराष्ट्रीय नियमों के लिए नए थे.
  • खशाबा ने अगले चार वर्षों के दौरान हेलसिंकी ओलंपिक की तैयारी के लिए और भी अधिक मेहनत की, जहां उन्होंने बैंटमवेट डिवीजन (57 किग्रा) में प्रतिस्पर्धा की, जिसमें 24 विभिन्न देशों के पहलवान शामिल थे. अपना सेमीफाइनल मैच हारने से पहले उन्होंने मैक्सिको, जर्मनी और कनाडा के पहलवानों को हराया था. हालांकि, उन्होंने कांस्य पदक जीतने के लिए वापसी की, जिससे वे स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता बन गए.

1948 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक

  • बड़े स्तर पर खशाबा का पहला अनुभव साल 1948 के लंदन ओलंपिक में आया जब कोल्हापुर के महाराजा ने उनकी  यात्रा को स्पोंसर किया. उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व लाइटवेट विश्व चैंपियन रीस गार्डनर द्वारा लंदन में ट्रेनिंग दी गई. खशाबा जिन्होंने पहले कभी मैट पर कुश्ती नहीं लड़ी थी, गार्डनर के निर्देशन में फ्लाईवेट डिवीजन में छठे स्थान पर रहे.
  • खशाबा, जिन्होंने पहले कभी मैट पर कुश्ती नहीं लड़ी थी, गुरु गार्डनर की गाइडेंस में फ्लाईवेट डिवीजन में छठे स्थान पर रहे. उन्होंने मैच के शुरुआती मिनटों में ऑस्ट्रेलियाई पहलवान बर्ट हैरिस को नॉकआउट कर वह बैठी जनता को चौंका दिया. अमेरिका के बिली जेर्निगन को हराने के बाद, वह ईरान के मंसूर रायसी से हार गए और इस तरह कम्पटीशन से अयोग्य घोषित कर दिए गए.
  • खशाबा ने अगले चार वर्षों के दौरान हेलसिंकी ओलंपिक के लिए अपने ट्रेनिंग की गति को तेज कर दिया, वजन को बढाया और 24 विभिन्न देशों के पहलवानों के बीच 125 पौंड बेंटमवेट डिवीजन में प्रतिस्पर्धा किया.

1952 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक

  • ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में थका देने वाले मैच के बाद उन्हें सोवियत संघ के राशिद मम्मडबेव से लड़ने के लिए कहा गया. नियमों के अनुसार, फाइट के बीच कम से कम 30 मिनट का ब्रेक होना चाहिए था, लेकिन चूंकि इस मामले पर बहस करने के लिए कोई भारतीय अधिकारी मौजूद नहीं था, जिसकी वजह से खशाबा थक हार कर लड़े और मम्मददेव ने मौके का फायदा उठाते हुए खशाबा को फाइनल में पहुंचने से पीछे धकेल दिया.
  • उन्होंने 23 जुलाई, 1952 को कनाडा, मैक्सिको और जर्मनी के पहलवानों को हराकर स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत पदक विजेता बनने के लिए कांस्य पदक जीता. कृष्णराव मंगवे, एक पहलवान जिसने एक ही ओलंपिक में एक अलग डिवीजन में प्रतिस्पर्धा की, एक अंक से कांस्य पदक जीतने से चूक गए.

खाशाबा जाधव को मिले अवार्ड और सम्मान (Khashaba Dadasaheb Awards And Honours)

  • 1982 में दिल्ली में एशियाई खेलों में मशाल रिले में भाग लेकर उन्हें सम्मानित किया गया था.
  • 1992-1993 में, छत्रपति पुरस्कार मरणोपरांत महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिया गया था.
  • 2000 में, उन्हें मरणोपरांत अर्जुन पुरस्कार मिला.
  • उनकी उपलब्धि की मान्यता में, दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए नवनिर्मित कुश्ती सुविधा को उनके नाम पर रखा गया था.
  • Google ने 15 जनवरी, 2023 को कंपनी के 97वें जन्मदिन पर जाधव के सम्मान में Google डूडल बनाया.

खाशाबा जाधव का निधन (Khashaba Dadasaheb Jadhav Death)

वह साल 1955 में पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर बने, जहां उन्होंने आंतरिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और खेल प्रशिक्षक के रूप में राष्ट्रीय कर्तव्यों का पालन भी किया. जाधव को जीवन में बाद में पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़ा, भले ही उन्होंने सहायक पुलिस आयुक्त के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले सत्ताईस साल पुलिस विभाग में काम करते हुए बिताए. उन्होंने खेल महासंघ की उपेक्षा के वर्षों को सहन किया और उन्हें अपने अंतिम वर्ष घोर गरीबी में बिताने पड़े.

साल 1984 में एक कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, और उनकी पत्नी को किसी से सहायता प्राप्त करने में काफी परेशानी हुई.

निष्कर्ष– आज के इस लेख में हमने आपको खाशाबा जाधव का जीवन परिचय (Khashaba Dadasaheb JadhavBiography In Hindi) के बारें में बताया. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरुर पसंद आई होगी.

FAQ

Q : खाशाबा जाधव का जन्म कब हुआ था?
Ans : 15 जनवरी 1926 में

Q : खाशाबा जाधव कौन थे?
Ans : भारतीय पहलवान

Q : खाशाबा जाधव का निधन कब हुआ?
Ans : 1984 में

 

 

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