आखिर क्यों होती है रोलेक्स की घड़ियां इतनी महंगी

रोलेक्स घड़ी का इतिहास, कीमत, खासियत, मालिक, रेट, शुरुआती कीमत, दुनिया की सबसे महंगी घड़ियां (Rolex Watch History, Price, Features, Owners, Rates, Starting Price, World’s Most Expensive Watches, why are Rolex watches so expensive)     

यूँ तो घड़ी समय बताती है लेकिन ब्रांडेड घड़ी पहनने वाले इंसान का समय बताती है. दुनिया की सबसे महंगी घड़ियो में शुमार रोलेक्स घड़ी (Rolex Watches) का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है. इस तरह की घड़ी को पहनना स्टेटस सिंबल के रूप में पहचाना जाता है. लाखों रूपये की कीमत वाली यह घड़ियां आम तौर पर बिजनेसमैन और रईसजादे के हाथ में दिखने को मिल जाएगी. रोलेक्स का नाम सुनते ही सभी के मन में एक बात जरूर आती होगी आखिर क्यों होती है रोलेक्स की घड़ियां इतनी महंगी (why are rolex watches so expensive).

तो आज के इस लेख में हम आपको रोलेक्स की घड़ियां के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है जिनमे हम आपको बतायंगे कि रोलेक्स घड़ी का इतिहास, रोलेक्स घड़ी की खासियत, रोलेक्स घड़ी की शुरुआती कीमत, रोलेक्स कंपनी के मालिक कौन है और क्यों है दुनिया की सबसे महंगी घड़ी.

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Credit – Rolex

रोलेक्स घड़ी के बारे में जानकारी

उत्पाद (Product) घड़ी
कंपनी (Company) रोलेक्स
मालिक (Owner) हंस विल्सडॉर्फ
मुख्यालय (Headquarters) जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड
स्थापित (Founded) 1905, लंदन, यूनाइटेड किंगडम
संस्थापक (Founders) हंस विल्सडॉर्फ, अल्फ्रेड डेविस
कर्मचारियों की संख्या (Number Of Employees) 30,000 कर्मचारी
दुनिया भर में रोलेक्स डीलर की संख्या (Rolex Dealers In The World) 1816 डीलर
रोलेक्स घड़ी शुरुआती कीमत (Rolex Watch Starting Price) 4 लाख रूपये
कितनी तरह की (Type of Watch) 14 सेगमेंट
सालभर में उत्पादन (Year Production) 10 लाख घडियों का
2025 तक बाज़ार (Market By 2025) 2.3 लाख करोड़ का मार्किट
स्विस घडियों के बाजार में हिस्सेदारी (Swiss Watch Market Share) 29% तक

रोलेक्स घड़ी का इतिहास (Rolex Watch History)

रोलेक्स घड़ी की शुरुआत करने वाले दो लोग थे- हैन्स विल्सडोर्फ (Hans Wilsdorf) और अल्फ्रेड जेम्स डेविस (Alfred James Davis). लेकिन मुख्य योगदान तो हैन्स विल्सडोर्फ का रहा है. यह घड़ी की एक कंपनी में काम किया करते थे. और फिर साल 1905 में लंदन में रोलेक्स कंपनी की शुरुआत की. लेकिन प्रथम विश्वयुद्ध होने की वजह से हैन्स विल्सडोर्फ लंदन छोड़कर जिनेवा, स्विट्जरलैंड चले गए. और वही पर रोलेक्स का हेडक्वार्टर बन गया.

 

रोलेक्स घड़ी की खासियत (Rolex Watch Advantages)

रोलेक्स घड़ी अपनी खास तरह की कारीगिरी के लिए पहचानी जाती है. रोलेक्स कंपनी का कहना है कि रोलेक्स की घड़ी सभी नार्मल घड़ियो से अलग है. वजह है इसकी अलग से रिचर्स एंड डिवेलपमेंट लैब है. और इन लैब में वर्कर द्वारा डिजाईन किया जाता है. और आपको बता दूँ रोलेक्स सिर्फ मैकेनिकल घड़ियां ही बनाती है. मैकेनिकल से अर्थ है कि इसमें सिर्फ मशीनरी का इस्तेमाल किया जाता है. मुकेश अंबानी की 8 सबसे महंगी चीजों के बारे में

पहली बार रोलेक्स साल 1953 में बनाई गई थी. उस घड़ी को स्पेशल स्विमर्स और डाइवर्स के बनाई गई. घड़ी में इतने छोटे छोटे पार्ट होते है कि इसे गिन पाना भी काफी मुश्किल होता है. बड़ी सावधनी से पुर्जों को जोड़ा जाता है. फाइनल टच हाथ से दिया जाता है.

रोलेक्स घड़ी में काम में लिया जाने वाला मैटेरियल काफी महंगा होता है. इसमें स्टील, प्लेटिनम और गोल्ड का इस्तेमाल होता है. साधारण घड़ियों में जहां 316L स्टील का उपयोग होता है तो वही रोलेक्स में 940L स्टील होता है. इसी वजह से यह काफी मजबूत और टिकाऊ होती है. घड़ी में वाइट गोल्ड का डायल होता है. और घड़ी में जो नंबर होते है वो स्पेशल कांच के प्लेटिनम से बनकर तैयार होता है. घड़ी में इस्तेमाल होने वाला गोल्ड भी 18 कैरेट का होता है. जो खुद की फैक्ट्री में तैयार होता है. ऐसा काम करने वाली रोलेक्स एकलौती कंपनी है. इसके अलावा इसमें चीनी मिटटी का भी इस्तेमाल होता है. इन घड़ियो का निर्माण जिनेवा मुख्यालय में होता है वहा सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाजे से किसी जेल से कम नही है.

घड़ी को इस तरीके से बनाया जाता है कि किसी भी परिस्थिति में सटीक समय बताये. दरअसल कंपनी की शुरुआत तो साल 1905 में हुई थी लेकिन पहली घड़ी साल 1953 में बनी थी. तो इनके बीच के समय में घड़ी का टेस्ट किया गया. जिसमे 39 हज़ार 370 फूट समुन्द्र के अंदर टेस्ट किया गया. कार क्रैश के 20 टेस्ट और लैब में कई तरह के टेस्ट से होकर गुजरा जाता है. साल 1953 में तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलेरी घड़ी को पहनकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर गए. जहा पर तेज हवा और बर्फ में इसका टेस्ट किया गया. यहाँ तक की रेगिस्तान में भी इसका टेस्ट किया गया है. इन सभी तरह के टेस्ट होने के बाद एक घड़ी तैयार होती है.

जब डॉलर से ज्यादा भरोसा हुआ रोलेक्स पर

साल 1970 में डॉलर के गिरने की वजह से अमेरिका का भरोसा जहा डॉलर से कम होता जा रहा था वहा कई लोगों ने भरोसा रोलेक्स की घड़ियों पर जताया. कमोडिटी के तौर पर इसको खरीदना शुरू किया. डीलर स्विट्जरलैंड से रोलेक्स की घडियां खरीदते और इटली में जाकर उसे बेचा देते. और फिर इटली के लोग इन घड़ियों को पहनकर अमेरिका और दुसरे देश जाते और वहा ज्यादा दाम में बेच देते. इस तरह से घड़ियों का कलेक्टर के रूप में मार्किट शुरू हो गया.

क्यों दोगुनी कीमत पर खरीद रहे है लोग

रोलेक्स घड़ी के कुछ मॉडल की कीमत आसमान छु रहे है. कुछ समय पहले गोल्ड रोलेक्स कॉस्मोग्राफ 41 लाख रूपये में बिक रही थी लेकिन इसकी कीमत में इजाफा हुआ और इसकी कीमत 76 लाख तक पंहुचा गई. मार्किट रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में रोलेक्स ने तक़रीबन 47 हज़ार करोड़ की बिक्री की थी.

क्यों सबसे महंगी है रोलेक्स की घड़ियां (Why Rolex Watches Are Expensive)

रोलेक्स की घड़ियो के महंगी होने का कारण है इसमें लगने वाला मैटेरियल. दरअसल इसमें काफी महंगा स्टील लगा होता है. और इसके अलावा घड़ी गोल्ड और प्लेटिनम से भी बनी होती है. सोने का पूरा काम रोलेक्स की फैक्ट्री में होता है. इसकी डिजाईन, मॉडल और वजन का काफी ध्यान रखा जाता है. साल भर में सिर्फ 10 लाख घडिया की बनकर तैयार होती है. रोलेक्स घड़ी को बनाने वाले वर्कर भी ज्यादा सैलरी लेते है. क्यों कि सारा काम हाथो से किया जाता है.

रोलेक्स की सबसे महंगी घड़ी (Most Expensive Rolex Watch In World)

हॉलीवुड एक्टर, रेस कार ड्राईवर और बिजनेसमैन पॉल न्यूमैन की पत्नी ने साल 1968 में उन्हें “रोलेक्स कॉस्मोग्राफ डेटोना” ग्रीन डायल (Paul Newman’s Rolex Daytona) घड़ी गिफ्ट की थी. इस घड़ी में पीछे ड्राइव भी बनवाया था. अक्टूबर 2017 में 17.8 मिलियन डॉलर में फिलीपींस सेंटर, न्यूयॉर्क में यह घड़ी नीलम हुई. आज के समय उस घड़ी की कीमत तक़रीबन 142 करोड़ रूपये है. जो रोलेक्स की सबसे महंगी घड़ी है.

रोलेक्स घड़ी शुरुआती कीमत (Rolex Watch Starting Price)

रोलेक्स घड़ी को खरीदना आप आदमी की बसकी बात नही है. इस घड़ी की शुरूआती कीमत की बात करे तो रोलेक्स की सबसे सस्ती घडी 4 लाख से शुरू होती है और 70 से 80 लाख रूपये तक जाती है.

रोलेक्स घड़ी के बारे में रोचक जानकारी (Interesting Facts About Rolex Watches)

  1. रोलेक्स का जो लोगो (Rolex Logo) है उसमे “क्राउन” का डिजाईन ब्रिटिश महारनी के सम्मान में बनाया गया है.
  2. न्यूयॉर्क में रोलेक्स की घडियों का मार्किट लगता है जहा पर घड़िया नीलाम होती है.
  3. लंदन में रोलेक्स कंपनी की शुरुआत हुई लेकिन प्रथम विश्वयुद्ध की वजह से जिनेवा में मुख्यालय बनाया गया.
  4. हर साल रोलेक्स की करीब 10 लाख घड़िया बनाई जाती है. और साल 2019 में 47 हज़ार की घड़िया बिकी थी.
  5. रोलेक्स की घडी 18 कैरेट वाइट गोल्ड, महंगा स्टील और प्लेटिनम से बनकर तैयार होती है.
  6. रोलेक्स की घडी की 14 सेगमेंट है सबसे सस्ती घड़ी की कीमत 4 लाख रूपये है.
  7. स्विस घड़ियों के बाज़ार में रोलेक्स की 29% हिस्सेदारी है और साल 2025 तक रोलेक्स का मार्किट 2.3 लाख करोड़ तक पहुँच जायेगा.
  8. रोलेक्स की सबसे महंगी घड़ी रोलेक्स कॉस्मोग्राफ डेटोना है जिसकी वर्तमान में कीमत 142 करोड़ रूपये है.
  9. साल 1905 में रोलेक्स कंपनी की शुरुआत हुई लेकिन पहली घड़ी साल 1953 में बनी थी.
  10. रोलेक्स की घड़ी में इतने छोटे छोटे मैकेनिकल पार्ट्स होते है कि उनकी गिनते करते करते आप थक जाओगे.

निष्कर्ष– आज के इस लेख में हमने आपको बताया रोलेक्स घड़ी का इतिहास, रोलेक्स घड़ी की खासियत, रोलेक्स घड़ी की शुरुआती कीमत, रोलेक्स कंपनी के मालिक कौन है और क्यों है दुनिया की सबसे महंगी घड़ी. के बारें में. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी.

FAQ

Q :  रोलेक्स घड़ी कंपनी के मालिक कौन है?
Ans : हैन्स विल्सडोर्फ

Q : रोलेक्स कौन बनाता है?
Ans : The Hans Wilsdorf Foundation

Q: क्या रोलेक्स के पास स्मार्टवॉच है?
Ans : रोलेक्स के पास स्मार्टवॉच नहीं है, रोलेक्स सिर्फ मैकेनिकल घडी बनाती है.

Q : रोलेक्स की घड़ी की कीमत कितनी है?
Ans : चार लाख से शुरू होकर 70 से 80 लाख तक

Q : क्या रोलेक्स की घड़ी में चाबी भरना होता है?
Ans : नही

Q : रोलेक्स की शुरुआत कब हुई ?
Ans : साल 1905 में

Q : रोलेक्स का मालिक कौन है
Ans : हैन्स विल्सडोर्फ

Q : रोलेक्स कंपनी कौन से देश की है?
Ans : जिनेवा, स्विट्जरलैंड

Q : हर साल कितने रोलेक्स बेचे जाते हैं?
Ans : 10 लाख तक

Q : रोलेक्स की पहली घड़ी कौन सी थी?
Ans : ऑयस्टर परपेचुअल

Q :  दुनिया में कितने रोलेक्स डीलर हैं?
Ans : 1816 डीलर

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मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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