चुनाव आयोग (Election Commission) क्या होता है ? कार्य, महत्व, अधिकार और नियम

भारत के एक लोकतान्त्रिक देश है। लोकतान्त्रिक देश होने के कारण यहाँ जनता के द्वारा सरकारों का गठन होता है और जनता अपनी सरकारों का चुनाव मतदान प्रक्रिया के द्वारा करती है। चाहे लोकसभा हो या विधानसभा हो दोनों ही चुनाव में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार का चुनाव इसी मतदान प्रक्रिया के द्वारा करते है। चूँकि लोकतंत्र का मुख्य आधार चुनाव ही है। इसलिए भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से करवाने वाली एक संस्था का गठन किया गया है। इस संस्था का काम देश में निष्पक्ष और शांति ढंग से चुनाव करवाना है। तो आज के इस लेख में चुनाव आयोग (Election Commission) क्या होता है, EC के कार्य, महत्व, अधिकार और नियम बताने जा रहे है.

Election Commission in hindi

भारत निर्वाचन आयोग Election Commission of India
निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 (राष्ट्रीय मतदाता दिवस )
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार
कर्मचारी 300
ऑफिसियल वेबसाइट eci.gov.in
मुख्यालय निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नयी दिल्ली, 110001
ईमेल complaints[at]eci[dot]gov[dot]in
टेलीफोन नंबर 23052220, 23052221

 

चुनाव आयोग क्या है 

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने भारत में चुनाव को निष्पक्ष और शांति तरीके से करवाने के लिए एक संस्था का गठन किया गया है, जिसको भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के नाम से जाना जाता है। भारत निर्वाचन आयोग को ही चुनाव आयोग (Election Commission) कहा जाता है। जिसका प्रधान कार्यालय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में है। भारत जैसे विशाल देश में जहाँ एक ओर जनसंख्या इतनी अधिक है तो वही दूसरी ओर भौगोलिक विषमता भी एक गंभीर चुनौती की भांति सिर उठाये खड़ी रहती है, वहां पर चुनाव का कार्य निर्विघ्न ढंग से सुनिश्चित करवाना एक जटिल और जिम्मेदारी भरा कार्य है। देश भर में वर्ष भर कोई न कोई चुनाव लगा ही रहता है और इन सभी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर ही है। इसलिए भारत जैसे देश में चुनाव आयोग का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है।

भारत में चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग प्रकार है परन्तु मुख्य रूप से समूचे देश के लिए एक लोकसभा और अलग अलग राज्यों के लिए अलग अलग विधानसभा का प्रावधान निश्चित किया गया है। लेकिन भारत में लोकसभा और विधानसभाओ के चुनाव के अलावा भी कई अन्य प्रकार के चुनाव होते है जिनमें राज्यसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव महत्वपूर्ण है। जबकि नगरीय निकाय चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की होती है। भारत में संविधान द्वारा अनुच्छेद 324 के द्वारा निर्वाचन आयोग को चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। इस प्रकार भारत में चुनाव आयोग का एक विशिष्ट स्थान है।

भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना

भारत में चुनाव आयोग का गठन एक स्वायत्त और अर्ध-न्यायिक संस्थान के तौर पर 25 जनवरी 1950 को हुआ था। तब से लेकर 15 अक्टूबर, 1989 तक केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित यह एक एकल-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा था। परन्तु 16 अक्टूबर, 1989 के बाद से यह संस्था तीन-सदस्यीय संस्था बन गया। इस प्रकार वर्तमान में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त हैं।

चुनाव आयोग की संरचना

भारत में चुनाव आयोग का गठन एक स्वायत्त और अर्ध-न्यायिक संस्थान के तौर पर 25 जनवरी 1950 को हुआ था। चुनाव आयोग का कार्यालय (सचिवालय) नई दिल्ली में स्थित हैं जिसमें लगभग 300 अधिकारी (कर्मचारी) कार्यरत होते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित तीनो आयुक्त राष्ट्रीय सिविल सेवा (IAS) से नियुक्त किये जाते हैं। राज्य स्तर पर निर्वाचन का कार्य राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा होता हैं।

चुनाव आयोग की नियुक्ति एवं कार्यकाल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित अन्य दोनों आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक निर्धारित किया गया है।

भारत में चुनाव आयोग की स्थिति

भारत में चुनाव आयोग को व्यापक अधिकार प्राप्त है। भारत में चुनाव आयोग की स्थिति उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के समान है तथा उनके वेतन व अन्य सुविधा भी उन्ही के समतुल्य है। भारत में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को केवल संसद के द्वारा महाभियोग से ही उनके पद से हटाया जा सकता है। चुनाव आयोग के द्वारा चुनाव का दिनांक घोषित करते ही आचार सहिता लागू हो जाता है। चुनाव आयोग की शक्ति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि चुनाव से पूर्व आचार संहिता लागू होने से लेकर चुनाव संपन्न होने तक पूरी प्रशासनिक तंत्र चुनाव आयोग के नियंत्रण में होता है। उस अवधि में सम्बंधित सरकार कार्यकारी माने जाते है और उनकी शक्ति सीमित हो जाती है। उस अवधि में सरकार कोई ऐसी घोषणा या कार्य नहीं कर सकती है जिससे मत पर प्रभाव पड़े। इसलिए उस अवधि में सरकार कोई बड़ा कार्य या तो नहीं करती है या फिर वो चुनाव आयोग की सहमति लेकर करती है। उस दौरान क्या सरकार क्या राजनीतिक पार्टियां सब को चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार चलना होता है। अगर चुनाव आयोग को लगता है कि उनके कार्य आचार सहिता के अनुरूप नहीं है तो चुनाव आयोग के पास इतनी शक्ति है कि वे उन पर कार्यवाही भी कर सकते है।

प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही चुनावों में चुनाव आयोग की समान जिम्मेदारी

लोकसभा एवं विधानसभा के अलावा चुनाव आयोग पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा  के चुनावों की जिम्मेदारी भी है। लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में जनता भाग लेती है जबकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चुनाव प्रत्यक्ष विधि से न होकर अप्रत्यक्ष विधि से होते है। इन चुनावों में जनता नहीं बल्कि जनता के चुने हुए उनके जनप्रतिनिधि भाग लेते है।

निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव करवाने की जिम्मेदारी

चुनाव आयोग अपने कर्तव्य को निभाते हुए यह सुनिश्चित करता हैं कि कोई भी वैध मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहें। साथ ही आयोग यह भी सुनिश्चित करता हैं कि चुनाव में कोई गड़बड़ी न हो। इस प्रकार चुनाव आयोग अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए एक निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव करवाने का हर संभव प्रयास करता हैं। यदि कही गड़बड़ी होती हैं तो वो उस पर तत्काल कार्यवाही भी करता हैं अथवा चुनाव में धांधली की शिकायत मिलने पर वो उसकी जाँच करता हैं और शिकायत की पुष्टि होने पर सम्बंधित क्षेत्र में चुनाव को फिर से करवाता हैं।

चुनाव आयोग और राजनीतिक दल

चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कार्य राजनीतिक दल को मान्यता देना हैं। बिना चुनाव आयोग की मान्यता के कोई दल राजनीतिक दल नहीं कहला सकता हैं। इसके साथ ही चुनाव आयोग ही राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर बटवारा करता हैं। अर्थात चुनाव आयोग अपने द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर सुनिश्चित करता हैं कि कोई राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय पार्टी कहलाएगी या क्षेत्रीय पार्टी।

इसके अलावा चुनाव आयोग ही किसी राजनीतिक पार्टी को उसका चिन्ह देता हैं जिसको लेकर राजनीतिक दल जनता के बीच जाती हैं और अपने चिन्ह पर लोगो को मत डालने के लिए विभिन्न प्रकार से प्रेरित करती हैं। चुनाव पूर्व घोषित आचार संहिता के बाद चुनाव आयोग सभी छोटे बड़े राजनीतिक दलों की एक सभा बुलाता हैं और उनसे आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन करने की अपेक्षा करता हैं साथ ही वो सभी पार्टियों के अधिकारों के अधिकारों की रक्षा भी करता हैं।

इतना ही नहीं चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के बीच विवादों का निपटारा भी करता हैं। जब कभी किसी राजनीतिक दल में बटवारा हो जाता हैं तो चुनाव आयोग ही विवादों का निपटारा करते हुए उन्हें एक अलग चिन्ह प्रदान करता हैं। इस अर्थ में चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के बीच एक अभिभावक का कार्य करता हैं।

चुनाव आयोग के अधिकार एवं कार्य

  • चुनाव आयोग की मुख्य जिम्मेदारी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा और अलग अलग राज्यों में होने विधानसभा की चुनावों को निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में करवाना हैं।
  • आयोग का कार्य राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह प्रदान करना हैं।
  • आयोग का कार्य आचार संहिता लागू होने पर सभी राजनीतिक पार्टियों से आदर्श आचार संहिता का पालन करवाना हैं।
  • चुनाव से पूर्व आचार संहिता लागू होने से लेकर चुनाव संपन्न होने तक पूरी प्रशासनिक तंत्र चुनाव आयोग के नियंत्रण में होता है और उस अवधि में चुनाव आयोग सरकार की भांति अपने अधिकारों का प्रयोग करता हैं।
  • लोक सभा चुनाव, चुनाव के दिनांक घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो जाता हैं और आचार संहिता लागू होते ही एक साधारण उम्मीदवार से लेकर देश के प्रधानमंत्री भी चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आ जाता हैं।
  • निर्वाचन का फॉर्म भरते समय गलत सूचना देने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करना और उसे चुनाव में भाग लेने से रोकना

चुनाव आयोग के नियम

आदर्श आचार सहिता लागू होने पर दल से सम्बन्धित व्यक्ति को पार्टी चिन्ह अथवा पार्टी का झंडा उपयोग करने पर कड़े निर्देश का पालन करना होता हैं। इसका दुरूपयोग करने पर आदर्श आचार संहिता का उलंघन मान लिया जाता हैं और चुनाव आयोग उस पर कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होता हैं। आदर्श आचार संहिता लागू होने पर पार्टी से जुड़े हुए अधिक मेसेज करने पर भी आदर्श आचार सहिता का उलंघन माना जाता हैं।

चुनाव आयोग का महत्व

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। एक लोकतान्त्रिक देश में आमचुनाव के द्वारा ही जनता अपनी सरकार को चुनती हैं। भारत जैसे विशाल देश में जहाँ एक ओर जनसंख्या इतनी अधिक है तो वही दूसरी ओर भौगोलिक विषमता भी एक गंभीर चुनौती की भांति सिर उठाये खड़ी रहती है, वहां पर चुनाव का कार्य निर्विघ्न ढंग से सुनिश्चित करवाना एक जटिल और जिम्मेदारी भरा कार्य है। देश भर में वर्ष भर कोई न कोई चुनाव लगा ही रहता है और इन सभी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर ही है। इसलिए भारत जैसे देश में चुनाव आयोग का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग अपने महत्वपूर्ण कर्तव्य को निभाते हुए यह सुनिश्चित करता हैं कि कोई भी वैध मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहें। साथ ही आयोग यह भी सुनिश्चित करता हैं कि चुनाव में कोई गड़बड़ी न हो। इस प्रकार चुनाव आयोग अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए एक निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव करवाने का हर संभव प्रयास करता हैं। इसलिए भारत में चुनाव आयोग की भूमिका एक विशिष्ट स्थान रखता हैं

निष्कर्ष : आज के इस लेख में आपने समझ चुनाव आयोग (Election Commission) क्या होता है, EC के कार्य, महत्व, अधिकार और नियम। अगर आपको कोई सुझाव देना है तो नीचे कमैंट्स जरूर करे।  

FAQ

Q : चुनाव आयोग का गठन कब हुआ?
Ans : चुनाव आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 को हुआ और इस दिन को हम राष्ट्रीय मतदाता दिवस  के रूप में मनाते है। 

Q : प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
Ans : श्री सुकुमार सेन

Q : भारत में प्रथम आम चुनाव कब हुआ?
Ans : भारतीय आम चुनाव वर्ष 1957 में हुआ।

Q : भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त कौन थे?
Ans : भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी॰ एस॰ रमादेवी थी। 

Q : मतदान दिवस कब है?
Ans : 25 जनवरी 1950

Q : वर्तमान में भारत का मुख्य चुनाव आयुक्त कौन है?
Ans : 1984 बैच के रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर राजीव कुमार

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मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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