आचार संहिता क्या होती है और इसके नियम कानून?

Code of Conduct in Hindi – भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। लोकतान्त्रिक देश होने के कारण यहाँ समय समय पर लोक सभा और राज्यों में विधान सभाओ के चुनाव होते रहते है। भारत जैसे देश में चुनाव एक जटिल प्रक्रिया है। इसलिए इसके लिए कई नियम निश्चित किये गए है जिसके द्वारा आदर्श और निष्पक्ष चुनाव को संपन्न कराया जा सकें। इसी के अंतर्गत चुनाव से पूर्व तिथि के घोषणा के बाद से सरकार, राजनैतिक पार्टियां और उम्मीदवारों के लिए कुछ नियमों को निश्चित गया है जिसको आचार संहिता के नाम से जाना जाता है।

code of conduct

आचार संहिता क्या होती है (What is a code of conduct)

आचार संहिता चुनाव से पहले सरकार, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग की ओर से जारी किया गया एक दिशा निर्देश है, जिसका पालन उन्हें करना होता है। यह निर्देश चुनाव आयोग की ओर से जारी किये जाते है इसलिए इनका पालन करने के लिए सम्बंधित चुनाव से जुड़े हुए मंत्री हो या एक आम उम्मीदवार हो, अथवा राजनैतिक पार्टियां हो, सभी को उन नियमो को पालन करना होता है। दूसरे शब्दों में यूँ कहे कि वे इन नियमो (आचार संहिता) का पालन करने के लिए बाध्य है। ऐसा नहीं करने पर आयोग के द्वारा उनपर कार्यवाही भी की जाती है।

इस प्रकार आचार संहिता चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है जबकि इसका समापन चुनाव के परिणाम आने पर स्वतः हो जाता है। आचार संहिता को ही आदर्श आचार संहिता अथवा चुनाव आचार संहिता भी कहा जाता है। आचार संहिता को अंग्रेजी में मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट (Model Code of Conduct) या कोड ऑफ़ कंडक्ट (Code of Conduct) कहते है। आचार संहिता लागू होते ही शासन से लेकर प्रशासन तक में कई परिवर्तन देखे जा सकते है। आचार संहिता में सम्बंधित सरकार की शक्ति सीमित हो जाती है और वे चुनाव आयोग के दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होते है।

आचार संहिता कब से कब तक लागू रहती है? (Duration of Code of Conduct)

आचार संहिता चुनाव की तिथि की घोषणा होते ही लागू हो जाती है और यह चुनाव परिणाम घोषित होने तक लागू रहती है। हालांकि आचार संहिता का वर्णन संविधान में नहीं किया गया है। फिर भी चुनाव आयोग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। क्योकि चुनाव आयोग की कई शक्तियों में एक शक्ति न्यायिक शक्ति भी होती है। राजनैतिक पार्टियों व चुनाव से सम्बंधित विषयो पर वो कोई नियम भी बना सकता है जिसको मानने के लिए सरकार, राजनैतिक पार्टियां और उम्मीदवार सभी बाध्य है।

क्यों लागू की जाती है आचार संहिता?

देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ही निर्वाचन आयोग के द्वारा आचार संहिता लागू की जाती है। इसका उद्देश्य सभी पार्टियों को सामान अवसर प्रदान करना भी होता है। ताकि कोई भी पार्टी अपनी शक्ति और धन के बल पर चुनाव परिणाम को प्रभावित न कर सकें।

आचार संहिता लागू होते ही केंद्र सरकार हो या कोई प्रदेश सरकार हो, न तो कोई घोषणा कर सकती है, न कोई शिलान्यास कर सकती है और न ही कोई शासन प्रशासन से सम्बंधित कोई बड़े निर्णय ले सकती है। वास्तव में, आचार संहिता लागू होते ही सरकार की शक्ति सीमित हो जाती है।

आचार संहिता के अंतर्गत आने वाले प्रमुख नियम (Code of Conduct Rules)

  • आचार संहिता लागू होते ही सरकार (केंद्र सरकार / राज्य सरकार) की शक्ति सीमित हो जाती है।
  • राज्य अथवा केंद्र के अधिकारी / कर्मचारी चुनाव आयोग के अधीन कार्य करते न की सरकार के अधीन।
  • सरकार किसी भी अधिकारी को किसी नई योजना पर कार्य करने अथवा उन पर किसी तरह का कोई दवाब नहीं बना सकती है।
  • सरकारी तंत्र का प्रयोग किसी पार्टी अथवा उम्मीदवार के लाभ पहुंचाने के लिए नहीं किया जा सकता है। लेकिन वे सरकारी कार्य हेतु सभी सुविधाओं का प्रयोग पहले की भांति कर सकते है।
  • सरकार की ओर किसी अधिकारी का ट्रांसफर अथवा उनकी पोस्टिंग नहीं की जा सकती है। आचार संहिता की अवधि में यह कार्य चुनाव आयोग के द्वारा ही होता है। उस समय सरकार मूकदर्शक की भूमिका में होती है।
  • सरकार कोई नई परियोजना, घोषणा, निर्माण कार्य, शिलान्यास आदि नहीं कर सकती है। लेकिन कोई कार्य पहले से जारी हो तो वो सामान्य तरीके से चलता रहता है। उन्हें रोकने का कोई प्रावधान नहीं है।
  • सरकारी धन से कोई ऐसा विज्ञापन नहीं दिखाया जा सकता है जो मतदाता को प्रभावित करने वाला हो और यदि जो जारी भी होता है उन्हें हटा दिया जाता है।
  • आचार संहिता के दौरान सरकार की शक्ति सीमित होने के कारण उन्हें कोई बड़े कार्य करने के लिए चुनाव आयोग से स्वीकृति लेनी पड़ती है।
  • चुनाव रैली का समय सीमित होता है। यह सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही हो सकती है।
  • चुनाव प्रचार के लिए किसी धार्मिक स्थल के प्रयोग पर रोक लगी होती है।
  • किसी विशेष स्थिति में यदि सरकार की ओर से जनता के लाभार्थ कोई कार्य करना आवश्यक होती है तो पहले चुनाव आयोग से स्वीकृति लेनी आवश्यक होती है।
  • राजनीतिक पार्टी या फिर कोई उम्मीदवार जनता को प्रभावित करने के लिए उन्हें धन (रिश्वत) नहीं दे सकते है।
  • मतदाता को किसी प्रकार से डराना-धमकाना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
  • इसके अलावा सरकार अपने योजनाओ अथवा कार्यो की होर्डिंग नहीं लगा सकती है और जो पहले से लगी भी होती है उन्हें आचार संहिता लागू होते ही हटा दिए जाते है।

आम जनता के लिए नियम

आदर्श आचार संहिता केवल सरकार, राजनैतिक पार्टियां व उम्मीदवारों के लिए ही नहीं होती है बल्कि कुछ नियम आम जनता के लिए भी होती है। जिससे प्रायः जनता अनभिज्ञ होते है। आम जनता सोशल मीडिया पर कोई ऐसी भड़काऊ पोस्ट नहीं डाल सकते जो, आचार संहिता के नियम के विरुद्ध हो। इसलिए आम जनता को ऐसी अवधि में कोई पोस्ट सोच समझकर लिखनी चाहिए अथवा शेयर करनी चाहिए जो, उन्हें किसी संकट में डालने वाला न हो। क्योकि आपत्तिजनक पोस्ट लिखने अथवा शेयर करने पर पोस्ट कर्ता पर कानूनी कार्यवाही तक हो सकती है।

आचार संहिता की अवहेलना करने पर कार्यवाही

आचार संहिता के उलंघन पर चुनाव आयोग की ओर से सख्त कार्यवाही की जाती है। यदि आयोग को ज्ञात होता है कि किसी उम्मीदवार ने आचार संहिता का उलंघन किया है तो वो उसके चुनाव प्रचार पर कुछ घंटो की रोक लगा सकता है। इसके साथ ही यदि आयोग को लगता है कि अपराध कुछ ज्यादा बड़ा है तो वो उस पर आपराधिक कानून के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए उसपर केस दर्ज करके उसे जेल भी भेज सकता है।

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मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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