राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है | President Election Process In India In Hindi

राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है, कौन करता है, कब होगा, पूरा प्रोसेस  (President Election Process In India In Hindi)

भारत में राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च प्रतिष्ठित पदों में से एक है। भारत में लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था है और यहाँ जनता के प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के द्वारा चुने गए शासक ही देश चलाते है। लेकिन भारत में राष्ट्रपति का चुनाव अमेरिका के राष्ट्रपति की तरह नहीं होता है। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन (Indirect Election) विधि से होता है। अर्थात भारत में राष्ट्रपति का चुनाव में जनता भाग नहीं लेती है बल्कि जनता के वोट से चुने गए प्रतिनिधि ही इस चुनाव में भाग लेते है। इसलिए राष्ट्रपति के चुनाव को प्रत्यक्ष निर्वाचन कहते है।

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राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

केंद्रीय चुनाव आयोग देश के 16वें राष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा कर चुका है। क्योंकि देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई 2022 को पूरा होने जा रहा है। इसलिए 15 जून 2022 को चुनाव आयोग के द्वारा अधिसूचना जारी करते ही देश के आगामी राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन की अंतिम दिनांक 29 जून तय कर दिया गया है और राष्ट्रपति का मतदान 18 जुलाई को निर्धारित किया गया है। परिणाम 21 जुलाई को घोषित किया जाएगा और नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण 25 जुलाई को होगा।

अब इसमें प्रश्न ये है कि राष्ट्रपति को वोट कौन देता है। वोटो की गिनती कैसे होती है। वोट करने वाले प्रत्येक सदस्य के वोट का मूल्य क्या होता है। ये ऐसे प्रश्न है, जो आम लोगो के लिए पेचीदा लगने वाले है। क्योंकि भारत में राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष विधि से होता है और इसमें सीधे जनता भाग नहीं लेती है बल्कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि इसमें भाग लेता है।

राष्ट्रपति के चुनाव में कौन वोट करता है

भारत के राष्ट्रपति का चयन संविधान के अनुच्छेद 55 के तहत आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है। इस निर्वाचक मंडल के सदस्यों को इलेक्टोरल कॉलेज (Electoral College ) भी कहा जाता है। निर्वाचन मंडल में राज्य और लोक सभा के निर्वाचित सदस्य के साथ साथ विधानसभा के सदस्य भी भाग लेते है। मगर इसमें वो सांसद भाग नहीं लेते है जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा हुई होती है। ऐसे में राज्यसभा के 12 और लोक सभा के 2 सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते है। इसमें केवल जनप्रतिनिधियों द्वारा चुने गए सदस्य या सीधे जनता के द्वारा चुने गए निर्वाचित सदस्य ही भाग लेते है। इस तरह इसमें लोकसभा, राज्य सभा और राज्य के विधान सभा के सदस्य भाग लेते है।

सदस्यों के वोट के मूल्यों का निर्धारण कैसे होता है?

सदस्यों के वोट के मूल्य का निर्धारण राज्य की जनसँख्या के आधार पर होता है। इसी पद्दति को आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था कहते है।

राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता

संविधान के अनुच्छेद 58 में राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता का वर्णन किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार राष्ट्रपति पद के लिए योग्यता –

  • वह भारत का नागरिक हो और वो 35 वर्ष पूरे कर चुका हो।
  • वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
  • वह दिवालिया घोषित न किया गया हो।
  • वह किसी न्यायालय के द्वारा दंड प्राप्त न हो।
  • वह किसी लाभ के पद पर आसीन न हो । परन्तु निम्न पदों के लिए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए छूट दी गई है – वर्तमान राष्ट्रपति, वर्तमान उपराष्ट्रपति, राज्य के राज्यपाल,  केंद्र या राज्य के मंत्री।

राष्ट्रपति का कार्यकाल और शपथ

राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। निर्वाचित होने पर भारत का मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India),  राष्ट्रपति को शपथ दिलाता है। मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश राष्ट्रपति को शपथ दिला सकता है।

राष्ट्रपति के चुनाव, आम वोटिंग पद्धति से अलग

आमतौर पर वोटिंग में कोई सदस्य किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में अपना वोट देता है मगर राष्ट्रपति के चुनाव में ऐसा नहीं होता है। भारत में राष्ट्रपति के चुनाव में एक विशेष विधि से वोटिंग होती है। इस पद्धति को सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहते है। इस पद्दति की यह विशेषता होती है कि मतदाता एक ही वोट देता है मगर वो अपनी वोटिंग को प्राथमिकता के आधार पर श्रेणीबद्ध करता है। इसके अंतर्गत उसे बैलेट पेपर पर अपनी पहली पसंद, दूसरी पसंद और तीसरी पसंद बता सकते है। सबसे पहले पहली पसंद के वोट ही गिने जाते है। यदि पहली पसंद वाले वोटो से विजेता का निर्णय नहीं हो पाता है तब उस स्थिति में वोटर की दूसरी पसंद के वोट को हस्तांतरित कर दिया जाता है। यही कारण है कि इस पद्धित को सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहते है।

राष्ट्रपति के चुनाव में सांसदों और विधायकों के वोट का मूल्य अलग अलग

राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेने वाले सांसदों और विधायकों के वोट के मूल्य अलग अलग होता है। दो अलग अलग राज्यों के विधायकों के वोटो की कीमत भी अलग अलग होती है। इसमें राज्य की आबादी ही मुख्य मानक का काम करता है। प्रत्येक राज्य की जनसंख्या और उनकी विधानसभा में सदस्यों की संख्या के आधार पर उस राज्य के एक विधायक के वोट की कीमत तय होती है।

राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों और विधायकों में मतपत्र भी अलग

भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में सांसदों और विधायकों के मतपत्र भी अलग अलग होते है। जहाँ सांसदों को हरे रंग का मतपत्र दिया जाता है तो विधायकों को गुलाबी रंग का मतपत्र दिया जाता है। इतना ही नहीं उन्हें वोट देने के लिए चुनाव आयोग के द्वारा विशेष प्रकार के पेन भी दिए जाते है, जिसके माध्यम से वें अपना वोट अंकित करते है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि सदस्य को उसी पेन से लिखकर वोट करना अनिवार्य होता है। अन्यथा ऐसा नहीं करने पर या किसी अन्य पेन का उपयोग करने पर वह वोट अमान्य मान लिया जाता है।

राष्ट्रपति चुनाव में मतपत्र पर सभी उम्मीदवारों के नाम अंकित होते है। वोटर को अपनी प्राथमिकता के आधार पर उन्हें अंको में क्रमबद्ध करना होता है जैसे 1 या 2 अंक के रूप में सम्बंधित उम्मीदवारों के नाम के सामने लिखकर वोट करना होता है। वैसे वोटर चाहे तो केवल अपनी पहली प्राथमिकता ही अंकित कर सकता है। सभी उम्मीदवारों को प्राथमिकता में लिखना अनिवार्य नहीं है।

निष्कर्ष : इस प्रकार भारत में राष्ट्रपति का चुनाव जहाँ एक ओर बेहद पेचीदा है तो वही यह गणितीय अंको की गणनाओ पर भी आधारित है। भारत में राष्ट्रपति पद ऐसा पद है जो दलगत से ऊपर होता है मगर चुनाव के समय राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को भी राजनैतिक दलों के सहयोग से ही चुना जाता है। जिस भी राजनीतिक दल या गठबंधन का बहुमत होता है उसी के उम्मीदवार राष्ट्रपति के चुनाव में विजय श्री का प्रसाद पाते है।

FAQ

Q : राष्ट्रपति का शासन काल कितना होता है?
Ans : 5 साल का

Q : भारत का प्रथम नागरिक कौन होता है?
Ans : राष्ट्रपति

Q : राष्ट्रपति का चुनाव कब होगा?
Ans : 18 जुलाई 2022 को

Q : भारत के राष्ट्रपति की नियुक्ति कौन करता है?
Ans : भारत के राष्ट्रपति का चयन संविधान के अनुच्छेद 55 के तहत आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है। निर्वाचन मंडल में राज्य और लोक सभा के निर्वाचित सदस्य के साथ साथ विधानसभा के सदस्य भी भाग लेते है।

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मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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