मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, कहानी, मुहूर्त और महत्व | Makar Sankranti 2023 Muhurat, Date And Time In Hindi

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, कहानी, मुहूर्त और महत्व, निबंध,आरती, तिथि, तारीख, पूजा विधि, कथा, धर्मराज की कहानी (Makar Sankranti 2023 Muhurat, Date And Time In Hindi, Kab Hai, Essay, Story, Festival, Significance, Puja Vidhi In Hindi

Makar Sankranti 2023 In Hindi – पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहां साल भर में 2000 से ज्यादा त्यौहार मनाए जाते हैं. इन सभी त्योहारों को मनाने का मकसद सिर्फ परंपरा या रीति-रिवाज नहीं होते, बल्कि हर त्योहार के पीछे ज्ञान, विज्ञान, स्वास्थ्य, प्रकृति और आयुर्वेद से जुड़ी कई बातें छिपी होती हैं. इन सभी फेस्टिवल में से एक है मकर संक्रांति. जिसे समूचे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. आमतौर पर इस त्यौहार को जनवरी के महीने में मनाया जाता है. और साल 2023 में मकर संक्रांति का महापर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. मकर संक्रांति भारत भर में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख उत्सव है. मकर संक्रांति की शुरुआत सर्दियों के अंत और लंबे दिनों का प्रतीक है. इस काल को उत्तरायण भी कहा जाता है और इसे बहुत ही शुभ माना जाता है. संक्रांति का दूसरा प्रतीक फसल उत्सव भी होता है. फसल उत्सव धार्मिक और साथ ही मौसमी अनुष्ठान दोनों है, और यह भगवान सूर्य, सूर्य देवता को समर्पित है, और इस दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करता है. यह त्योहार मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में मनाया जाता है और यह दुनिया भर के भारतीयों और हिंदुओं द्वारा भी मनाया जाता है. देश में अलग अलग प्रान्त के लोग इसे अलग तरह से मानते है. उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है तो वही महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, कर्नाटक और तेलंगाना में पौष गीतक्रांति, मध्य भारत में सुकरत, असमियों द्वारा माघ बिहू, और तमिलों द्वारा पोंगल भी कहा जाता है.

आज के इस आर्टिकल में हम आपको मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, कहानी, मुहूर्त और महत्व (Makar Sankranti 2023 Muhurat, Date And Time In Hindi ) के बारें में पूरी जानकारी देने वाले है.

Makar Sankranti Date And Time In Hindi

मकर संक्रांति क्या है (What is Makar Sankranti in Hindi)

संक्रांति से तात्पर्य सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने से है. सौर मास एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय होता है. यूं तो 12 सूर्य संक्रांतियां होती हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांतियां महत्वपूर्ण हैं, जिनमें कर्क, मेष, तुला और मकर संक्रांति हैं. मकर संक्रांति के दिन शुभ मुहूर्त में स्नान करना, दान और पुण्य करना काफी अहम माना गया है. मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर गुड़ और तिल का भोग लगाकर नर्मदा में स्नान करने से लाभ की प्राप्ति होगी है. संक्रान्ति के दिन तेल, गुड़, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान करने से इसका अधिक पुण्य प्राप्त होता है. कहा जाता है कि धरती पर सबसे अच्छे दिन की शुरुआत 14 जनवरी से होती है. क्यों कि इस दिन से सूर्य दक्षिण की बजाय उत्तर की ओर बढ़ने लगता है. माना जाता है कि जब सूर्य की किरणें पूर्व से दक्षिण की ओर चलती हैं तो सूर्य की किरणों का प्रभाव बुरा होता है. लेकिन जब सूर्य पूर्व से उत्तर की ओर गमन करता है तो उसकी किरणें स्वास्थ्य और शांति में वृद्धि करती हैं.

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है (Why Is Makar Sankranti Celebrated In Hindi)

मकर संक्रांति को आध्यात्मिक साधनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना गया है क्यों कि इस दिन लोग पवित्र नदियों में जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में डुबकी लगाते हैं. मान्यता है कि स्नान करने से पुण्य या पिछले जन्मों के पाप ख़त्म हो जाते हैं. मकर संक्रांति का दिन किसानों के लिए काफी अहम होता है. इस दिन देश के सभी किसान भाई अपनी अपनी फसल काटते है. मकर संक्रांति भारत का एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसे हर वर्ष 14 या 15 जनवरी के दिन मनाया जाता है. इस दिन सूर्य उत्तर की तरफ बढ़ता है. हिंदू धर्म में उनके लिए धूप नहीं बल्कि ईश्वर, शक्ति और ज्ञान है. मकर संक्रांति का पर्व सभी को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की प्रेरणा देता है. इस दिन नये काम करने की शुरुआत होती है. इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक वातावरण ज्यादा सचेत रहता है. इसलिए जो लोग साधना करते है वह इस प्रकाश का लाभ उठा सकते है.  

मकर संक्रांति का महत्व (Importance Of Makar Sankranti In Hindi)

मकर संक्रान्ति के दिन से शीत ऋतु समाप्त होने लगती है और भारतीय नदियों से वाष्पीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है क्योंकि मकर संक्रान्ति से ही सूर्य भारत की ओर गमन करने लगता है. वैज्ञानिकों की माने तो नदियों से निकलने वाली भाप से कई रोग दूर हो जाते हैं, इसलिए मकर संक्रांति के दिन देश की पवित्र नदियों में स्नान करना भारतीय संस्कृति के अनुसार शुभ और वैज्ञानिकों की दृष्टि से मानव शरीर के लिए लाभदायक है. मकर संक्रांति के दिन तिल से बनी मिठाई खाई जाती है, जो वैज्ञानिक रूप से शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है.

मकर संक्रांति पूजा (Makar Sankranti 2023 Puja)

इस खास दिन को मानने वाले लोग अपने घरों में मकर संक्रांति की पूजा करते हैं. इस दिन जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो शनिदेव भी तिल से सूर्य की पूजा करते हैं. मकर संक्रांति की पूजा करने के लिए तांबे के बर्तन में जल, लाल फूल, सिंदूर और तिल मिलाकर सुबह के समय उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए. सूर्य देव का जप करते हुए तीन बार ॐ सूर्याय नम: मंत्र बोले. अगर संभव हो तो पवित्र नदी में डुबकी लगाए.

वैसे इस दिन भगवान विष्णु की भी पूजा अर्चना की जाती है. शास्त्रों की माने तो माघ मास में प्रतिदिन तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. अगर आप रोजाना तिल से भगवान विष्णु की पूजा नहीं कर सकते हैं तो आपको मकर संक्रांति के दिन पूजा जरूर करनी चाहिए. घी का दीपक जलाएं और भगवान से प्रार्थना करें कि जाने-अनजाने हमसे कोई भूल या पाप हो गया हो तो उन सभी से मुक्ति प्रदान करे.

मकर संक्रांति 2023 का तिथि और शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2023 Date And Timing)

वैसे तो हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है, लेकिन साल 2023 में तारीख को लेकर लोगो में असमंजस सा बना हुआ है. कुछ पंडितो का कहना है कि इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी के दिन मनाया जाएगा. लेकिन हिन्दू कैलंडर के अनुसार इस साल सूर्य 14 जनवरी दिन शनिवार को 08 बजकर 01 मिनट पर धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में जायेगा. उदय तिथि के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी रविवार के दिन मनाया जाएगा. इसका शुभ मुहूर्त 07 बजकर 15 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक और महापुण्य काल 07 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा.

मकर संक्रांति को क्या करना चाहिए? (Makar Sankranti celebration)

  • मकर संक्रांति के दिन भारत की पवित्र नदियों और तीर्थों स्थानों पर नहाना, दान और नए काम की शुरुआत का विशेष महत्व माना गया है.
  • सूर्य उगने के बाद खिचड़ी, तिल से बनी मिठाई को सबसे पहले सूर्य भगवान को भोग लगाए. इसके बाद दान दक्षिणा करे.
  • नहाते समय पानी में तिल और गंगाजल डाले और ओम सूर्याय नमः मन्त्र का जप करे.
  • मकर संक्रांति के दिन देशी घी, वस्त्र, खिचड़ी, गुड़, कंबल, तिल और तेल का दान विशेष बताया गया है.
  • इस दिन देश के कई हिस्सों में पतंग भी उड़ाई जाती है और साथ में तिल के लड्डू और पकोड़ी खाई जाती है.
  • किसानों के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन फसलों की कटाई की जाती है।

मकर संक्रांति को पतंग क्यों उड़ाई जाती है?

मकर संक्रांति के दिन भारत के कई शहरों में पतंग उड़ाई जाती है। इस दिन को पतंग उत्सव के नाम से भी जाना जाता है. एक पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा भगवान श्रीराम के समय से शुरू हुई थी. तमिल साहित्य के अनुसार भगवान राम ने मकर संक्रांति के दिन एक पतंग उड़ाई थी और वह पतंग इंद्रलोक चली गई थी. भगवान राम द्वारा शुरू की गई इस परंपरा का आज भी पालन किया जा रहा है।

अगर स्वास्थ्य से जोड़कर देखे तो पतंगबाजी को सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. दरअसल, मकर संक्रांति के दिन काफी ठंड होती है ऐसे में धूप में पतंग उड़ाने से शरीर को एनर्जी मिलती है. धुप में विटामिन डी होता है जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है. इसके अलावा सर्दियों में त्वचा संबंधी समस्याओं से भी निजात दिलाने में मदद करती है.  

वैसे इस दिन पतंगबाजी का माहौल सा बना रहता है. कई जगह पर लोग पतंग उड़ाकर इस पर्व को मनाते है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार पतंग उड़ाने से दिमाग का संतुलन बना रहता है और दिल स्वस्थ रहता है. हाथ उंगलियों और पैर की कसरत होती है.

क्या हैं मकर संक्रांति त्यौहार के अलग अलग नाम

भारत के अलग अलग प्रान्त में मकर संक्रांति का पर्व अलग अलग नाम से मनाया जाता है. उन सभी के नाम हम आपको नीचे बताने वाले है-

  1. उत्तर प्रदेश – उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के पर्व को खिचड़ी पर्व के नाम से जानते है. इस दिन सूर्य देव की पूजा अर्चना की जाती है. दाल और चावल की खिचड़ी खाई जाती है इसके अलावा दान भी दी जाती है. इस दिन हरिद्वार जैसी पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है.
  2. गुजरात और राजस्थान – इन दोनों राज्य में उत्तरायण पर्व के नाम से इसे मनाया जाता है. इस दिवस पर गुजरात और राजस्थान में पतंग उत्सव का आयोजन भी किया जाता है जिसे हम KITE FESTIVAL MAKAR SANKRANTI के नाम से जानते है. इस दिन अलग अलग तरह की पतंग उड़ाई जाती है.
  3. आंध्रप्रदेश – आंध्रप्रदेश में इस पर्व को मकर संक्रमामा के रूप में जानते है. और यह उत्सव तीन दिनों तक मनाया जाता है.
  4. तमिलनाडु – तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के नाम से मनाया जाता है. वहीं यह पर्व किसानों का प्रमुख पर्व है. इस दिन सभी घरों में दाल-चावल की खिचड़ी बनाकर एक दूसरे में बांटी जाती है.
  5. महाराष्ट्र – महाराष्ट्र में इस दिन लोग गजक और तिल के लड्डू बनाते है और एक दुसरे को गिफ्ट के तौर पर देते है.
  6. पश्चिम बंगाल – पश्चिम बंगाल में हर वर्ष हुगली नदी के तट पर गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है. इस नदी में लोग डुबकी लगाते है.
  7. असम – असम में इस पर्व को भोगली बिहू के नाम से मनाते है.
  8. पंजाब – पंजाब में इस पर्व को लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है। पंजाबी में इस त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन किसान कटाई शुरू करते हैं.
  9. हरियाणा – हरियाणा में इस पर्व को मगही नाम से मनाते है.
  10. कश्मीर – कश्मीर में इस पर्व को शिशुर सेंक्रांत नाम से मनाते है.

मकर संक्रांति पर क्या दान करें

मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. अब कई लोगों के मन में यह सवाल है कि इस दिन क्या दान किया जा सकता है तो हम आपको नीचे विस्तार से बताने जा रहे हैं-

तिल का दान – मकर संक्रांति के दिन काले या सफ़ेद तिल का दान करना चाहिए. ऐसा करने से सूर्य देव की कृपा सदैव बनी रहती है धन में वृद्धि और दोषों से मुक्ति मिलती है.

गुड़ का दान – इस दिन गुड़ का दान अवश्य करना चाहिए. ऐसा करने से आपके तीन ग्रहों सूर्य, शनि और गुरु के दोष दूर हो जाते हैं.

कंबल का दान – मकर संक्रांति पर पूजा के बाद गरीबों को अपनी क्षमता के अनुसार कंबल और गर्म कपड़े दान करने चाहिए. ऐसा करने से आपकी कुंडली में राहु ग्रह से जुड़ा दोष दूर हो जाएगा.

खिचड़ी का दान – इस दिन हरे मूंग, काली उड़द और चावल की खिचड़ी का दान करने से गुरु, शनि और बुध से संबंधित दोष दूर होते हैं.

चावल का दान – इस दिन चावल का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. ऐसा कहा जाता है कि चावल चंद्रमा का प्रतीक है.

निष्कर्ष– आज के इस लेख में हमने आपको बताया मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, कहानी, मुहूर्त और महत्व (Makar Sankranti 2023 Muhurat, Date And Time In Hindi) के बारें में बताया. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी.

FAQ

Q : मकर संक्रांति कब है
Ans : 15 जनवरी 2023

Q : मकर संक्रांति का क्या अर्थ है
Ans : इस दिन से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है.

Q : मकर संक्रांति 2023 वाहन क्या है
Ans : बाघ

Q : 2023 में मकर संक्रांति कब है
Ans : 15 जनवरी

Q : गूगल मकर संक्रांति कब है
Ans : 15 जनवरी 2023

Q : मकर संक्रांति कितने तारीख को है
Ans : 15 जनवरी 2023

Q : मकर संक्रांति को क्या बनाकर खाई जाती है
Ans : तिल के लड्डू

Q : मकर संक्रांति पर्व कब है
Ans : 15 जनवरी 2023

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