द्वितीय विश्व युद्ध के कारण, परिणाम एवं प्रभाव पर निबंध | World War Second Kab Hua, History, Eassy in Hindi

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द्वितीय विश्व युद्ध के कारण, परिणाम, प्रभाव, निष्कर्ष, इतिहास (World war 2 Kyo Aur Kab Hua, History, Eassy In Hindi) dwitiya vishwa yudh Kab Hua Tha , 2nd world war in hindi, The Second World War Kyo Aur Kab Hua History Eassy in Hindi

World War II

द्वितीय विश्व युद्ध क्यों हुआ था (World War 2 In Hindi)

कौनसा युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War in Hindi)
कब शुरू हुआ 01 सितंबर 1939 
कब समाप्त हुआ 2 सितम्बर 1945
कितने वर्षो तक चला 6 वर्ष और 1 दिन
जगह यूरोप, प्रशांत, अटलांटिक, दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, मध्य पूर्व, भूमध्यसागर, उत्तरी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका, संक्षेप में उत्तर और दक्षिण अमेरिका
युद्ध शक्ति
मित्र राष्ट्र धुरी शक्तियाँ
फ्राँस, ब्रिटेन, अमेरिका, सोवियत संघ और चीन जर्मनी, इटली और जापान
16,000,000 सैनिक मारे गए 8,000,000 सैनिक मारे गए
45,000,000 नागरिक मारे गए 4,000,000 नागरिक मारे गए

 

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद राष्ट्रों के बीच शांति बनाये रखने के लिए एक पहल की गई थी जिसके अंतर्गत राष्ट्र संघ का गठन किया गया था। लेकिन राष्ट्र संघ के गठन के बाद भी द्वितीय विश्व युद्ध हो गया और राष्ट्र संघ युद्ध को रोकने में पूर्णतः नाकाम साबित हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध बहुत अधिक विनाशकारी था। यह विश्व का अब तक का सबसे अधिक भयानक और अधिक समय तक चलने वाला महायुद्ध था। इस युद्ध ने विश्व की एक बड़ी आबादी की जान ले ली। कुछ शहर पूर्णतः नष्ट हो गए तो कई शहर बर्बाद हो गए। इस महाविनाशकारी युद्ध के बाद विश्व में बहुत बदलाव हो गया। यह युद्ध इसलिए भी सबसे अधिक विनाशकारी था क्योकि इस युद्ध में पहली बार परमाणु बम का प्रयोग किया गया। इस युद्ध में लगभग 7 करोड़ लोग मारे गए थे और लाखो लोग बेघर हो गए जिसमे अधिकांश नागरिक थे। जन-जीवन तबाह और बर्बाद हो गया। इस कारण द्वितीय विश्व युद्ध को अब तक का सबसे विनाशकारी युद्ध माना जाता है। द्वितीय विश्व के इतिहास की उन घटनाओ में शामिल है, जिसको युगो युगो तक भुलाया नहीं जा सकता है। मानव सभ्यता ने इससे पहले ऐसा भयानक महायुद्ध कभी नहीं देखा था।

द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण (Cause of First World war 2 in Hindi)

द्वितीय विश्वयुद्ध के अनेक कारण थे –

  • वर्साय की अपमानजनक संधि
  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद निर्मित राष्ट्र संघ की असफलता
  • पूंजीवाद और साम्यवाद के बीच टकराव की चरम स्थिति
  • 1929 में आयी विश्व आर्थिक मंदी
  • जर्मनी में तानाशाह हिटलर का अभ्युदय
  • फ्रांस और ब्रिटेन की अदूरदर्शी विदेशनीति
  • जर्मनी का पोलैंड पर आक्रमण करना

वर्साय की अपमानजनक संधि

द्वितीय विश्व युद्ध का सबसे प्रमुख कारण मित्र राष्ट्रों के द्वारा जर्मनी के साथ की गई वर्साय की संधि था। जर्मनी जैसे स्वाभिमानी देश के लिए वर्साय की संधि घोर अपमानजनक थी जिससे वहां के जनमानस अपने आपको अपमानित महसूस कर रहे थे। इस संधि के अंतर्गत यह माना गया था कि जर्मनी ही उस भयानक युद्ध (प्रथम विश्व युद्ध) का जिम्मेदार है और वर्साय की संधि के अंतर्गत उस पर उनके प्रकार के प्रतिबन्ध लगा दिए गए। क्षतिपूर्ति के रूप में उससे बहुत अधिक जुर्माना भी मांगा गया। उसकी सैनिक शक्ति को दुर्बल बना दिया गया और भविष्य उसकी सैन्यशक्ति के विस्तार पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया। जर्मनी का एक भू-भाग उससे छीन लिया गया। इस तरह प्रथम विश्व युद्ध समाप्त करने के लिए जर्मनी तात्कालिक रूप से उस संधि को तो मान लिया था मगर वहां की जनता इस संधि को जर्मनी के साथ अन्याय मानती थी। जर्मनी प्रतिशोध की अग्नि में जल रहा था। परिणाम यह हुआ कि जब उन्हें हिटलर के रूप में एक मुखर चेहरा मिला तो फिर जर्मनी अगले युद्ध की तैयारी करने में लग गया। हिटलर सत्ता में आते ही वर्साय की संधि को तोड़ दिया और जर्मनी को युद्ध में झोंक दिया। अब यही कारण है कि कई जानकारों का कहना है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बीज प्रथम विश्व युद्ध में ही बो दिए गए थे।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद निर्मित राष्ट्र संघ की असफलता

प्रथम विश्व युद्ध के बाद राष्ट्रों के बीच शांति बनाये रखने व उनके बीच युद्ध रोकने के लिए 1919 में राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी। मगर द्वितीय विश्व युद्ध रोकने में राष्ट्र संघ पूर्णतः असफल साबित हुआ। राष्ट्र संघ एक अंतराष्ट्रीय संघटन था जिसका उद्देश्य राष्ट्रों के बीच टकराव को रोकना था। मगर यह अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया क्योकि इसके पास न तो अपनी कोई सेना थी और न ही इसमें सभी देश शामिल थे। सबसे बड़ी बात यह थी आज का सुपर पॉवर कहा जाने वाला अमरीका इसका सदस्य नहीं था।

1929 में आयी विश्व आर्थिक मंदी

द्वितीय विश्वयुद्ध के एक कारण 1929 – 30 में आयी भयानक आर्थिक मंदी भी थी। मंदी के कारण विश्व मांग में भारी गिरावट आयी जिसके कारण उत्पादन गिर गया। उत्पादन गिरने से रोजगार का संकट भयानक रूप ले लिया। रोजगार में भारी कमी से गरीबी, भुखमरी, असंतोष व भय का माहौल बन गया। इस कारण विश्व के अधिकांश देश मंदी से उबरने के लिए कोशिश करने लग गए जबकि उसी का लाभ उठाकर हिटलर मनमानी करने लग गया और विश्व युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई।

जर्मनी में तानाशाह हिटलर का अभ्युदय

द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रधान कारण जर्मनी में हिटलर का अभ्युदय था। जर्मनी के लोग वर्साय की संधि से अत्यंत क्रुद्ध थे। वे इसे अपने आप पर जबर्दश्ती थोपी गई संधि मानते थे। उसी बीच बर्ष 1933 में हिटलर जर्मनी का चांसलर बन गया। जो बाद में तानाशाह बन गया। हिटलर ने जर्मनी के लोगो को आश्वासन दिया कि वो जर्मनी का स्वाभिमान को फिर से वापस लौटाएगा और इस तरह वो आगे चलकर मनमानी करने लग गया। हिटलर ने अपनी योजना के अनुसार पोलैंड पर आक्रमण कर दिया जो आगे चलकर विश्वयुद्ध में बदल गया। इस प्रकार कहा जाता है कि यदि हिटलर न होता तो विश्व को द्वितीय महायुद्ध जैसा विनाशलीला देखने को न मिलता।

फ्रांस और ब्रिटेन की अदूरदर्शी विदेशनीति

हिटलर खुलेआम वर्साय की संधि का उलंघन करने लग गया था। इसके लिए वो गुप्त रूप से तैयारी भी कर रहा था। वो आधुनिक हथियारों का निर्माण और संग्रह भी कर रहा था। ब्रिटेन और फ्रांस को हिटलर की सभी गुप्त गतिविधियों की जानकारी थी मगर इसके बावजूद वे इसके लिए गंभीर न थे। ब्रिटेन और फ्रांस की गुप्त विदेश नीति में जर्मनी के द्वारा साम्यवादी रूस को रोकना था। लेकिन ऐसा हो न सका और हिटलर इंग्लैंड और फ्रांस से ही उलझ गया।

जर्मनी का पोलैंड पर आक्रमण

विश्वयुद्ध का आरम्भ 1 सितंबर, 1939 को जर्मनी के द्वारा पोलैंड पर आक्रमण के साथ हो गया। जर्मनी के पोलैंड पर आक्रमण के बाद उसके बचाव में ब्रिटेन और फ्रांस आगे आ गए और उन्होंने जर्मनी के के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर कर दी। हालांकि यह युद्ध अधिक समय तक नहीं चला और एक महीने के भीतर ही जर्मनी और सोवियत रूस ने पोलैंड का आपस में बँटबारा कर लिया मगर इसके बाद कुछ जर्मनी यही नहीं रुका वो लगातार आगे बढ़ता रहा और इसी क्रम में उसने 5 महीने की युद्ध विराम के बाद नार्वे और डेनमार्क पर आक्रमण कर दिया और मई, 1940 में जर्मनी ने हालैंड और बेल्जियम को भी पराजित कर दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points of World War 2)

  • द्वितीय विश्व युद्ध का आरम्भ 1 सितम्बर, 1939 को जर्मनी की पोलैंड पर आक्रमण के साथ हो गई ।
  • अमेरिका के द्वारा 6 व 9 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा व नागासाकी शहर पर परमाणु बम गिराए जाने के साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध का समापन हो गया था।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध अब तक एक सबसे भयानक युद्ध था जो लगभग 6 वर्षो (1939-45) तक चला।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध दो गुटों में बंटा हुआ एक महाविनाशकारी महायुद्ध था।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध दो प्रमुख गुट – धुरी राष्ट्र और मित्र राष्ट्र थे।
  • धुरी राष्ट्र में जर्मनी, इटली और जापान थे तो मित्र राष्ट्र में ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, अमेरिका और रूस थे।
  • इस महायुद्ध में लगभग 7 करोड़ लोगो को अपनी जान गवांनी पड़ी थी जो उस समय की दुनिया की कुल आबादी के लगभग 3 प्रतिसत थे।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी का दो भागो में बटबारा हो गया – पश्चिम जर्मनी और पूर्वी जर्मनी।
  • इस युद्ध के बाद ब्रिटेन बहुत कमजोर पड़ गया। वो अब विश्व की महाशक्ति भी नहीं रह गया था। अब विश्व का सुपर पॉवर अमेरिका बन चुका था।
  • ब्रिटेन के कमजोर होने का सीधा सीधा लाभ भारत को हुआ जिसके कारण भारत 1947 स्वतंत्र हो पाया।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ही 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई।

द्वितीय विश्वयुद्ध  का अंत (End of World War 2 in Hindi)

द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत 1 सितम्बर, 1939 को जर्मनी की पोलैंड पर आक्रमण के साथ हो गई थी। यह महायुद्ध जल, थल और वायु में लड़ी गई थी। इस महायुद्ध में उस समय के सभी विकसित हथियारों का प्रयोग किया गया था। इस युद्ध में पहली वार परमाणु बम का प्रयोग किया गया था। यह युद्ध लगभग 6 वर्ष तक चला था। इस युद्ध में लगभग 7 करोड़ लोगो ने अपनी जान गवाँई थी। अमेरिका के द्वारा 6 व 9 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा व नागासाकी शहर पर परमाणु बम गिराए जाने के साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध का समापन हो गया था।

द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत की भूमिका

द्वितीय विश्वयुद्ध के काल खंड में भारत अंग्रेजो के हांथो अधीन था। उस समय अंग्रेज जो चाहते थे, वे अपनी मनमानी करते थे। इसी क्रम में अंग्रेजो ने भारत को भी युद्ध की अग्नि में झोंक दिया था। इस तरह से उस समय अंग्रेजो के अधीन भारत आधिकारिक रूप से द्वितीय विश्व युद्ध में सम्मिलित हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध की भांति द्वितीय विश्वयुद्ध में भी भारत को बहुत ही जान माल की क्षति हुई थी। उन छह बर्षो में अंग्रेज ने भारत से लगभग 20 लाख लोगो को सेना में भर्ती किया और उन्हें विश्व के विभिन्न युद्ध ग्रस्त क्षेत्रो में भेज दिया। इतना है नहीं अंग्रेजो ने युद्ध के नाम पर देश भर के रियासतों से भी बहुत अधिक धनराशि वसूल की। इस तरह प्रथम विश्वयुद्ध की भांति द्वितीय विश्वयुद्ध में भी भारत को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

निष्कर्ष – तो आज के इस लेख में आपने जाना द्वितीय विश्वयुद्ध (First World War 2 in Hindi) के बारे में. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी. अगर आपका कोई सुझाव है तो कमेंट करके जरूर बताइए. अगर आपको लेख अच्छा लगा हो तो रेटिंग देकर हमें प्रोत्साहित करें.

FAQ

Q :  द्वितीय विश्व युद्ध कब हुआ?
Ans : 1 सितंबर 1939 को

Q :  द्वितीय विश्व युद्ध कब समाप्त हुआ?
Ans : 2 सितंबर 1945 को

Q :  द्वितीय विश्व युद्ध किन देशों के बीच हुआ?
Ans : जर्मनी, इटली,जापान और फ्राँस, ब्रिटेन, अमेरिका, सोवियत संघ, चीन

Q : परमाणु बम कहां गिरा था?
Ans : अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा (जापान) और 9 अगस्त 1945 को  नागासाकी (जापान) शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था।

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