भारत छोड़ो आन्दोलन क्या है? | Quit India Movement In Hindi

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1942 भारत छोड़ो आन्दोलन, निबंध, निष्कर्ष, विरोध, कब हुआ, समाप्त, कारण, लाभ, हानि ( Quit India Movement In Hindi, Bharat Chhodo Andolan Ke Karan, Causes, date, summary, essay)

भारत पर लंबे समय तक अंग्रेजों हुकूमत का शासन रहा है। ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के लिए कई क्रांतिकारियों ने अपने जीवन की कीमत चुकाई। इस स्वाधीनता को प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार की असंख्य क्रांतियाँ की गईं, जिनमें असंख्य नागरिक भाग लेते रहे। इन क्रांतियों में से एक, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था, “भारत छोड़ो आंदोलन” था। इस आंदोलन से ब्रिटिश सरकार को भारी नुकसान हुआ और अंग्रेजों ने तय किया कि वे भारत पर अधिक समय तक शासन नहीं कर पाएंगे।

आज के इस आर्टिकल में हम आपको भारत छोड़ो आन्दोलन (Quit India Movement In Hindi) के बारें में जानकरी प्रदान करने वाले है.

Quit India Movement In Hindi

क्या है 1942 भारत छोड़ो आंदोलन (What Is 1942 Quit India Movement In Hindi)

देश की आजादी के लिए जहाँ एक ओर अनेक आंदोलन हुए तो वही दूसरी ओर अनगिनत लोगो ने आजादी के लिए यातनाओ की चरम सीमाएं सही। आजादी की लड़ाई लड़ते हुए अनगिनत पुरुषों और महिलाओं ने अपने कीमती जीवन का बलिदान दिया। उन्ही महान स्वतंत्रता सेनानियों के कारण सन 1947 में देश आजाद हो पाया। उन्ही में से एक आंदोलन था – ‘भारत छोड़ो आंदोलन’। इस आंदोलन की शुरुआत महात्मा गाँधी के द्वारा की गई थी। भारत छोड़ो आंदोलन ऐसे समय में आरम्भ हुआ जब दुनिया में कई बदलाव देखने को मिल रहे थे। द्वितीय विश्वयुद्ध जारी था, अब जहाँ एक ओर विश्व में युद्ध का माहौल था तो वही उसी युद्ध भरे माहौल में सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजो से दो दो हाथ करने के लिए सेना तैयार कर रहे थे।

भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत कब हुई (Quit India Movement Start)

अप्रैल 1942 में क्रिप्स मिशन के विफल हो जाने के बाद अगस्त में देशव्यापी आंदोलन का आरम्भ किया गया। इस आंदोलन को भारत छोड़ो आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। इस आंदोलन को 8 अगस्त, 1942 को बम्बई में हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की बैठक में पारित किया गया था, जिसकी शुरूआत एक दिन बाद 9 अगस्त, 1942 को हुई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य देश को अंग्रेजो से तुरंत आजाद कराने के लिए सविनय अविज्ञा करना था। इस आंदोलन का असर समूचे देश में हुआ था। देखते ही देखते यह आंदोलन जन-आंदोलन का रूप ले लिया। 

क्यों महत्वपूर्ण है 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Important Of Quit India Movement)

1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन जल्द ही देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया। एक समय तो ऐसा लगा कि भारत उसी आंदोलन में आजाद हो जाएगा। मगर दुर्भाग्य से ऐसा हो न सका। इस आंदोलन के बाद भी भारत को आजादी नहीं मिली। आजादी मिली भी तो इस आंदोलन के पांच वर्ष बाद 1947 में। लेकिन इतना तो हो गया कि इस आंदोलन में अंग्रेजो को दिख गया कि वे अब और अधिक दिनों तक भारत को अपने अधीन नहीं रख सकते है। इतना ही नहीं, इस आंदोलन की अवधि में ही देश के कुछ क्षेत्र अपने आपको स्वतंत्र करने में सफल भी रहा। हालांकि आधिकारिक रूप उन्हें स्वतंत्र नहीं माना गया क्योकि उनकी पूर्ण स्वतंत्रता के लिए आवश्यक था कि समूचा देश अंग्रेजों से मुक्त हो।

अंग्रेजो ने इस आंदोलन को दबाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अंग्रेजो ने सबसे पहले इस आंदोलन से जुड़े सभी बड़े नेताओ को जेल में डाल दिया। इसके साथ ही आंदोलन को गैर कानूनी घोषित करते हुए इसके पक्ष में बोलना व कार्य करने पर रोक लगा दी गई। यहाँ तक कि अंग्रेजी सरकार ने समाचार पत्र में भी इस आंदोलन पर लिखने पर रोक लगा दी। परिणाम यह हुआ कि कई समाचार पत्र अंग्रेजी सरकार के सामने घुटने टेकने के बदले समाचार पत्र निकालना ही बंद कर दिया।

अंग्रेजी सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए वर्ष 1942 के अंत होते होते लगभग लाखो लोगो को देश के विभिन्न जेलों में डाल दिया। लाखो की संख्या में मारे गए। इस आंदोलन में अनेक स्त्रियां व बच्चे भी सम्मिलित हुए थे। पटना सचिवालय पर सात युवको ने झंडा फहराने की ठानी। वे सब हाथ में झंडा लेकर एक – एक करके आगे बढ़ते रहे और अंग्रेजी सेना उन पर गोली चलाती रही। मगर अंत में वे झंडा फहराने में सफल रहे। आज भी पटना सचिवायल के बाहर उन सपूतो की प्रतिमा देखकर व उनके बलिदान को याद करके आँखे भर जाती है। यह घटना इसी आंदोलन के दौरान हुई थी।

ऐसी और भी अनेक घटनाएं देशभर में घटी। इस आंदोलन में कितने लोग मारे गए इसकी कोई आधिकारिक जानकारी किसी के पास उपलब्ध नहीं है। लेकिन एक मोटे आंकड़े की यदि बात करें तो देशभर में इस आंदोलन के चलते लाखों स्त्री, पुरूषों व बच्चो ने अपनी जान गवाई। लाखो को जेल के अंदर डाल दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि देशभर में हड़ताल और प्रदर्शन होने शुरू हो गए। अंग्रेज कभी उन पर लाठीचार्ज करते तो कभी गोलीबारी तो कभी उन्हें पकड़ कर जेल में डाल देते। इस आंदोलन में देशभर में यही सब चलता रहा। 

सरकार के क्रूरतम दमनकारी शासन के विरुद्ध जनता ने लगभग युद्ध छेड़ रखा था। सरकारी सम्पत्तियों को क्षति पहुंचाई गई। अनेक स्थानों पर से रेलवे की पटरियां को उखाड़ दी गई। डाक – तार व्यवस्था को तहस नहस कर दिया गया। देशभर में अंग्रेजी प्रसाशन और जनता आमने सामने थी। इस प्रकार यह आंदोलन एक जन आंदोलन का व्यापक स्वरुप ले लिया था। देशभर में लोगो ने अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेखने का मन बना लिया था।

भारत छोड़ो आंदोलन का परिणाम (Quit India Movement Result)

  • 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के मिले-जुले परिणाम रहे। यह न तो कोई बड़ी सफलता थी और न ही पूर्ण असफलता.
  • इस आंदोलन के बाद अंग्रेजी सरकार की नींव हिल गई। इस अर्थ में इस आंदोलन को हम सफल कह सकते है।
  • इस आंदोलन ने सोये हुए भारतीय को जगा दिया। उन्हें सोचने को बेबस कर दिया कि वे अब और अधिक गुलामी का जीवन नहीं जी सकते।
  • इस आंदोलन ने देशभर में राष्ट्रीयता को नए सिरे से जन्म दिया। अब लोग देश की आजादी के लिए किसी भी सीमा को पार करने को उतारू गए थे।
  • इस आंदोलन में स्त्रियों ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया था। इससे स्त्री नेतृत्व को आगे आने में सहयोग मिला।
  • यदि इस आंदोलन की असफलता की बात करें तो इसमें लाखो लोगो की जाने गई। लाखो लोगो को जेल में डाल दिया गया। कई लोग अपनों से बिछड़ गए। कई लोगो की जिंदगी बर्बाद हो गई। अंग्रेजी सरकार ने क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दी। आंदोलन को दबाने के नाम पर गांव के गांव में आग लगा दिए गए। इस तरह इस आंदोलन में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत जाने गई। लेकिन इतना सब होने के बाद भी देश को आजादी नहीं मिली।

भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख बिन्दु (Quit India Movement Points)

  • 8 अगस्त, 1942 को गाँधी ने, बम्बई से भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी।
  • गाँधी जी ने बम्बई के गोवालिया टैंक (मैदान) में अपने भाषण “करो या मरो” का नारा दिया था। इस मैदान को अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है।
  • मुस्लिम लीग, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं हिन्दू महासभा ने आंदोलन का समर्थन नहीं किया था।
  • इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्ति दिलाना था।
  • जिस समय भारत में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई थी उस समय भारत में ब्रिटेन की ओर से वायसराय लार्ड लिनलिथगो का शासन था।

निष्कर्ष– आज के इस लेख में हमने आपको भारत छोड़ो आन्दोलन (Quit India Movement In Hindi) के बारें में बताया. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरुर पसंद आई होगी.

FAQ

Q : भारत छोड़ो आंदोलन कब हुआ था?
Ans : 9 अगस्त 1942 को

Q : भारत छोड़ो आंदोलन का दूसरा नाम क्या है?
Ans : अगस्त क्रांति

Q : भारत छोड़ो नारा किसका है?
Ans : महात्मा गांधी

Q : अंग्रेज भारत छोड़कर कब गए थे?
Ans : 15 अगस्त 1947 में

Q : भारत छोड़ो आंदोलन में कितने लोगों की जान गई?
Ans : 15,000 से अधिक लोगों को जेल, 8,783 को सजा और 134 लोगों को मार दिया गया.

Q : भारत छोड़ो आंदोलन कब खत्म होगा?
Ans : 1943 के अंत में

Q : महात्मा गांधी का नारा क्या है?
Ans : भारत छोड़ो

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