मक्खियों के बारे में रोचक तथ्य | Interesting Facts About Housefly | Wonder Facts

मक्खियों के बारे में रोचक तथ्य – हमारे आसपास मक्खियों का होना आम बात है, हमारे घर में दिखने वाली मक्खियां उन 10 लाख मक्खियों की प्रजातियों में से एक है जो पृथ्वी पर मौजूद है। ये मक्खियां पृथ्वी पर हर जगह पायी जाती है, इन घर में दिखने वाली मक्खियों को अंग्रेजी में हाउसफ्लाई (housefly) कहा जाता है । मादा मक्खी के पंख नर मक्खी की तुलना में ज्यादा बड़े होते है और नर मक्खी के पैर मादा मक्खी की तुलना में ज्यादा लम्बे होते है। ये मक्खियां आम तौर पर प्रवाही खाना ही खाती है लेकिन ये ठोस चीजे भी खा सकती है, इनका थूक ठोस खाने को नरम करने में मदद करता है। मक्खियों के पैरो के निचले हिस्से पर स्वाद पहचानने वाले अंग होते है जिससे वो शक्कर जैसी चीजों को उनके ऊपर बैठकर पहचान लेती है। कई बार मक्खियां अपने दो पैरो को एक दूसरे से रगड़ती हुई दिख जाती है, ऐसा वो इसीलिए करती है ताकि उनके पैरो को साफ़ करके आगे की चीज का स्वाद पहचानने के लिए तैयार कर सके।

Housefly

मक्खियों के बारे में रोचक तथ्य | Interesting Facts About Housefly

  • मक्खियों के पैरो के पंजे की नीचे की ओर चिपकने वाली गद्दी होती है जिससे वो दीवार पर और दूसरी सतहों पर बिना गिरे चल पाती है। जैसे चलते वक्त हमेशा हमारा कोई एक पैर जमीन पर रहता है वैसे मक्खियों के छह में से तीन पैर हमेशा सतह को छुए रहते है, लेकिन जब मक्खी छत पर या कही और उल्टा होकर चलती है तब तीन की बजाय चार पैर हर वक्त सतह पर रहते है। मक्खियां हमेशा सीधा होकर ही उड़ती है लेकिन जब उसे छत या किसी उलटी सतह पर उतरना होता है तो वो सतह पर पहुंचने से ठीक पहले खुद को घुमा लेती है और सतह पर उतरते वक्त वो अपने अगले दो पैरो से उतरने के झटके को कम करती है, जबकि बाकी के चार पैरो से गति को रोकती है।
  • एक मादा मक्खी अपने जीवनकाल में 500 अंडे दे सकती है, एक बार में मादा मक्खी 75 से 50 अंडे देती है। मक्खी के अंडे सफ़ेद और लम्बाई में 1.2 मिलीमीटर लम्बे होते है। मक्खियां अपने अंडो को सड़ते हुए खाद्य पदार्थ और मल जैसी चीजों में देती है और जब अंडो में से लार्वा बाहर निकलते है तो अपने आसपास की उन्ही चीजों को खाकर बड़े होते है। ये लार्वा सिर से पतले और बिना पैरो वाले होते है, इनकी लम्बाई 3 से लेकर 9 मिलीमीटर तक बढ़ती है। लार्वा प्रकाश से बचते है और आमतौर पर उनके लिए अनुकूल जगह पशु का खाद होती है जहा उन्हें गर्म, नम और अँधेरी जगह मिलती है।
  • लार्वा दो हफ्तों में पूरी तरह विकसित हो जाता है लेकिन अगर ठंडी परिस्थिति हो तो एक महीना भी लग सकता है। लार्वा अपने अंतिम समय में ठंडी और सुखी जगह पर रेंगता है और प्यूपा (pupae) में बदल जाता है, जो दिखने में बेलन आकार का और लम्बाई में 1.2 मिलीमीटर का होता है, प्यूपा 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में दो से छह दिनों में पूरी तरह विकसित हो जाता है लेकिन अगर तापमान कम हो तो 20 दिन या उससे अधिक समय लग सकता है। शुरू शुरू में प्यूपा पिले रंग का होता है लेकिन विकसित होते होते ये पिले से लाल, लाल से भूरा और अंत में भूरे से काले रंग का हो जाता है।
  • उसके बाद प्यूपा के कवच को फाड़कर उसमे से मक्खी बाहर निकलती है और फिर मक्खी अपने पुरे दो हफ्तों से एक महीने के जीवनकाल में उसी आकार की रहती है, जब हम किसी छोटी मक्खी को देखते है तो वो असल में युवा मक्खी नहीं होती बल्कि जब वो लार्वा के रूप में होती है तब उसे पर्याप्त भोजन ना मिलने के कारण छोटी रह जाती है। नर मक्खी प्यूपा से निकलने के 16 घंटो में यौन परिपक्व हो जाते है, जबकि मादा मक्खी 24 घंटो में।
  • इंसानो को मक्खियां जरा भी पसंद नहीं है क्योकि मक्खियां काम के वक्त इंसानो के आसपास मंडराती है जिससे वो परेशान हो जाते है, मक्खियां खाने पर बैठती है जिससे खाना दूषित हो जाता है इस वजह से इंसान मक्खियों को नापसंद करते है। मक्खियों के लार्वा का इस्तेमाल मछलियों के लिए पौष्टिक आहार के रूप में किया जाता है। मक्खियां अपने प्रजनन की जगह से उड़कर कई किलोमीटर दूर तक जा सकती है, जिससे वो कई ज्यादा दूर तक कई तरह के रोग फैला सकती है क्योकि मक्खियों के शरीर पर कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस हो सकते है।

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मक्खियों के बारे में रोचक तथ्य | Interesting Facts About Housefly

  • द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने मक्खियों का इस्तेमाल दुश्मन के खिलाफ किया था। जिसमे विमान से मक्खियों को बैक्टीरिया के घोल में लेपकर डाला जाता है, इसका उपयोग सन 1942 में चीन के बोशोन (Baoshan) में और सन 1943 में उत्तरी शेडोंग (Northern Shandong) में किया था। इस हमले ने शुरुआत में ही 60,000 लोगो को मार डाला था और शेडोंग के हमले में 2,10,000 लोग मरे गए थे, हालांकि जापानी सैनिको को पहले से ही इसका टिका लगाया जा चूका था ताकि इसका असर उनपर न हो।
  • हालांकि मक्खियों का इस्तेमाल मानवता की भलाई के लिए भी किया जा सकता है, मक्खियों के लार्वा को पृथ्वी पर बढ़ते और हमारे द्वारा फैलाये जा रहे कचरे को कम करने के लिए भी किया जा सकता है, लार्वा का इस्तेमाल पशु खाद के लिए भी किया जा सकता है जो जमीन की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है।
  • मक्खियों के बारे में कुछ ख़ास बाते भी है, मक्खियों की आँखें इस तरह से होती है की वो एक ही समय पर अपने चारोओर देख पाती है जबकि हमें पीछे देखना हो तो हमें पीछे मुड़ना पड़ता है। लेकिन मक्खियों के आँखें में पुतलिया नहीं होती जिससे वो अपनी आँखें में आने वाली रौशनी को नियंत्रित नहीं कर सकती और अपनी नजर एक चीज पर केंद्रित नहीं कर सकती।
  • क्या आपने सोचा है की मक्खियों को पकड़ना इतना मुश्किल क्यों होता है, हम पूरी तेजी से अपना हाथ उसके पास ले जाते है फिर भी वो उड़कर निकल जाती है। ऐसा इसीलिए है की मक्खियां हमसे कही ज्यादा तेज है, मक्खियां केवल 20 मिलीसेकंड से अपनी प्रतिक्रिया कर सकती है। मक्खियों के लिए दुनिया हम इंसानो के मुकाबले 7 गुना धीमी चलती है यानी मक्खियां स्लोमोशन (Slow Motion) में पूरी दुनिया को अनुभव करती है इसीलिए जब भी हम मक्खियों के पास तेजी से अपना हाथ ले जाते है तो उनके पास काफी समय होता है वहा से हटने के लिए। मक्खी के पंख एक सेकंड में 200 बार फड़फड़ाते है।

तो दोस्तों ये थी मक्खियों से जुडी कुछ रोचक बाते मैं आशा करता हूँ कि आपको ये लेख जरूर पसंद आया होगा , बहुत बहुत धन्यवाद्

मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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