ज्यादा सकारात्मक होना अच्छा नहीं होता | Negative Side of Positive Thinking | Wonder Facts

“कोई भी चीज ज्यादा मात्रा में अच्छी नहीं होती” ये बात हमें किसी बड़े से कभी ना कभी जरूर सुनने को मिली होगी और ये बात मेरे ख्याल से बिलकुल सच भी है। और ऐसा नहीं है की ये बात कुछ चीजों पर लागु होती है, ये बात हर चीज पर लागु होती है, हर एक चीज पर। फिर वो चीज चाहे कितनी भी अच्छी क्यों ना हो, चाहे वो अमृत ही क्यों ना हो।

कैसे रखे सकारात्मक सोचा

हम जब बहुत ज्यादा मुश्किल में और चिंता में होते है तो YouTube पर मोटिवेशनल वीडियोस ढूंढने लगते है, अगर एक बार हम मोटिवेशनल वीडियो देख ले तो फिर हमें उसकी लत लगने लगती है और अगर कुछ दिन मोटिवेशनल वीडियोस देखने को ना मिले तो बेचैनी होने लगती है। जितनी देर तक मोटिवेशनल वीडियो हमारी आँखें के सामने चल रहा होता है तब तक हम जोश से भरे रहते है और ऐसा महसूस करने लगते है की अब तो पूरी दुनिया जीत के आ जायेंगे। लेकिन जैसे ही वीडियो ख़त्म करने के बाद कुछ समय बीतता है तो नशा उतरने लगता है और फिर क्या? एक और नया मोटिवेशनल वीडियो ढूंढेंगे।

हम ऐसा मोटिवेशनल वीडियो ही देखने के लिए ढूंढेंगे जो हमारी सोच के अनुकूल हो। जैसे अगर हम पढ़ाई में अच्छे नहीं है और परीक्षा में कम मार्क्स (Marks) आने की वजह से चिंता में है तो ऐसा वीडियो देखेंगे जिसमे ये कहा गया हो की “कम मार्क्स की वजह से दुखी होने की कोई जरुरत नहीं है पेपर में आये मार्क्स ये तय नहीं कर सकते की हमारा भविष्य कैसा होगा”।

और चाहे मोटिवेशनल वक्ता (Motivational Speaker) कोई भी हो एक बात सभी के भाषण में समान होती है की “परिस्थिति चाहे कैसी भी हो अपनी सोच सकारात्मक (Positive) रखो”। चाहे तुम्हारी जिंदगी इधर की उधर क्यों ना हो जाये लेकिन तुम सकारात्मक रहो। ज्यादा सकारात्मकता (More Positivity) हमें सहनशील (Tolerant) बना देती है। अगर आप कही पर कई सालो से नौकरी कर रहे हो, आप पूरे मन से मेहनत कर रहे हो, ता की आपकी तरक्की (Promotion) हो सके। आपको ऐसा महसूस होता है कि आपके मालिक (boss) का कोई इरादा नहीं है आपकी तरक्की करने का। फिर भी आप खुद को समझा लेते हो की सकारात्मक सोच रखो और तुम्हारी प्रगति जरूर होगी। ऐसी सोच से आप खुद को उस परिस्थिति के लिए सहनशील बना रहे हो।

जब कोई कहता है कि सकारात्मक रहो (Be Positive) तो ये ऐसा ही है कि कोई आपसे कहे की इस ब्लैक एंड वाइट पेंटिंग में सिर्फ वाइट कलर ही देखो। ये बात कहकर मैं ये भी नहीं कह रहा हूं की सिर्फ ब्लैक कलर ही देखो यानि सिर्फ नकारात्मक ही सोचो। जिंदगी के हर एक पहलू को अपनाना चाहिए, ऐसे जबरदस्ती सकारात्मक होने का क्या फायदा। कोई सकारात्मक रहने के लिए कहता है तब वो ये दलील देता है कि नकारात्मक सोच रखने से थोड़ी ना कुछ बदल जायेगा, मतलब हर परिस्थिति में हंसते रहो। लेकिन ये बात भी सच है कि सिर्फ सकारात्मक होने से भी कुछ नहीं बदल जाता।

Positive

सकारात्मक सोच सिर्फ हमारे दिमाग को बेहतर महसूस कराने के लिए है और हमारे दिमाग को धोखा देने के लिए है कि कुछ भी बुरा नहीं है सब अच्छा ही अच्छा है। हर व्यक्ति, हर देश खुद को बेहतर ही दिखायेगा, वो क्यों चाहेगा कि उसकी कमियाँ पूरी दुनिया को पता चले । ये मत देखो की आधा गिलास खाली है, बल्कि ये देखो की आधा गिलास भरा हुआ है, ये है सकारात्मक सोच। हम सच्चाई से भाग रहे है, क्यों सिर्फ ये देखो कि आधा गिलास भरा हुआ है और सिर्फ ये भी क्यों देखो की आधा गिलास खाली है, क्यों ना दोनों को साथ देखें।

सकारात्मक सोच की शक्ति कैसे काम करती है?

सिर्फ चांद की ब्राइट साइड को देखना और डार्क साइड को अनदेखा करना ठीक नहीं क्योंकि दोनों पक्ष एक ही सच्चाई का हिस्सा है। हम चाहे कितना भी इंसानी समाज के प्रति सकारात्मक हो, लेकिन हममें खुबिया और कमियां 50-50 प्रतिशत नहीं बल्कि कमिया ज्यादा है खूबियों के मुकाबले। अगर सोशल मीडिया पर कोई अच्छी चीज डाली जाती है तो वो कुछ दूरी तक जाकर ही दम तोड़ देती है, लेकिन अगर एक फर्जी खबर है और मसालेदार है तो वो रातो रात फेल जाएगी। झूठी और बुरी चीजों की खासियत है कि ये वायरस की तरह तेजी से फैलती है।

अगर दो व्यक्ति के बीच लड़ाई हो रही है, जिसमे एक व्यक्ति हमलावर (Attacker) है जो सिर्फ हमला करता है और दूसरा व्यक्ति रक्षक (defender) है जो सिर्फ उन पर होने वाले हमले से खुद का बचाव करता है तो ज्यादा संभावना होती है कि हमलावर व्यक्ति जीतेगा। अच्छाई की प्रवृति हमेशा रक्षक (defender) की होती है, वो किसी पर वार नहीं करती क्योंकि वो अच्छी है और बुराई की प्रवृति हमलावर (attacker) की होती है और हमेशा हमला करती है क्योंकि वो बुरी है।

सकारात्मकता हमेशा बुरी नहीं होती, सकारात्मक सोच हमारी कार्यक्षमता को बढ़ाता है और इससे संभावना बढ़ जाती है कि सकारात्मक सोच के साथ किये गए कार्य में सफलता मिलेगी। लेकिन जब सकारात्मक सोच हमें सहनशील बनाने लगे या वास्तविकता से दूर करने लगे तब वो सही नहीं होता। किसी भी क्षेत्र में प्रगति करने में सबसे महत्वपूर्ण बात होती है कि अपनी कमियों से सीखना और खुद को बहेतर बनाते जाना, लेकिन जब हम सकारात्मक सोच रखने के चलते अपनी कमियों को नजरअंदाज करने लगते है तो वो प्रगति के बजाय दुर्गति होती है। सिर्फ नकारात्मक सोच भी हमारी प्रगति में बाधा होती है, कई लोगो का नजरिया ऐसा होता है कि उन्हें हर चीज में कमियां दिखती है और सोचते है कि कभी कुछ नहीं बदलने वाला। पूरी पेंटिंग (painting) देखो, सिर्फ ब्लैक या सिर्फ वाइट कलर नहीं।

 

मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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