भूकंप कैसे आता है | भूकंप आने के कारण और प्रकार | Earthquake In Hindi

भूकंप किसे कहते हैं | भूकंप आने के कारण | भूकंप का प्रभाव | भूकंप का केंद्र | भूकंप से कैसे बचे | भूकंप कैसे आता है | भूकंप क्या है | भूकंप के प्रकार | भूकंप की तीव्रता का मापन

Earthquake In Hindi : हर साल दुनिया भर में कहीं न कहीं भूकंप की खबरें आती रहती हैं. रात को जब हम सोते है और अचानक देखते है कि बेड और आसपास रखी चीजें अपने आप हिलने लगती है. इस डर से लोग जाग जाते है और घरों से बाहर निकल जाते है. दरअसल भूकंप एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) है. अक्सर जब भूकंप आता है तो उसका एक केंद्र होता है. और इसकी तीव्रता हम रिक्टर स्केल से मापते है. हर साल सैकड़ों लोग भूकंप की वजह से मारे जाते है. 8 नवम्बर 2022  की रात को उत्तर भारत के सभी हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. बताया जाता है कि इसका केंद्र नेपाल में था जिसके चलते कई लोगो की मौत हो गई. अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि भूकंप (Earthquake In Hindi) कैसे आता है, इसके आने के कारण और यह कितने प्रकार के होते है. हम आपको इन सभी के बारें में विस्तार से जानकारी देने वाले है.

Earthquake In Hindi

भूकंप क्या है (What Is An Earthquake In Hindi)

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो किसी भी स्थान पर कभी भी आ सकती है. आसन शब्दों में समझें तो जब पृथ्वी की सतह हिलने या कंपन होने लगती है तब भूकंप आता है. इसकी वजह से पृथ्वी से निकलने वाली भूकंपीय तरंगें सभी दिशाओं में फैलने वाली तरंगों को उत्पन्न करता है. पृथ्वी की सतह के ठीक नीचे का स्थान जहाँ से भूकंप का कंपन शुरू होता है उसे हाइपोसेंटर कहते है और पृथ्वी की सतह से ठीक ऊपर के स्थान को उपरिकेंद्र कहा जाता है. इस स्थान पर भूकंप की तीव्रता सबसे अधिक होगी और कंपन भी तेज़ होगा. जैसे-जैसे कंपन की आवृत्ति कम होती जाती है, उसका प्रभाव भी कम होता जाता है. कुछ भूकंप इतने ज्यादा खतरनाक होते है कि पूरा शहर धरती में समा जाते है.

भूकंप आने के कारण (Causes Of Earthquake In Hindi)

भूकंप आने के कारण क्या है इसे समझने के लिए हमे वैज्ञानिक रूप से धरती की संरचना को समझना होगा. यह पृथ्वी 15 से 20 टेक्टॉनिक प्लेटों से बनी है. जिसमें मुख्य प्लेटों की संख्या 7 (अरबी प्लेट, कैरिबियन प्लेट, जोन दे फूका प्लेट, कोकोस प्लेट, नाजका प्लेट, फिलिपीन सागर प्लेट, स्कोश्या प्लेट) होती है. यह पृथ्वी के स्थलमंडल के नीचे तरल पदार्थ लावा के रूप में कमजोर और नरम एक चट्टानों की परतें होती हैं जो निरंतर धीमी गति से तैरती रहती हैं. स्वाभाविक रूप से, अधिकांश भूकंप टेक्टोनिक प्लेट्स के आपस में टकराने से आते है. उनके बीच के गेप को फॉल्ट लाइन कहते है. जैसे ही यह प्लेटें आपस में टकराती है तो उनके कोने टूट जाते है और घर्षण की वजह से आपस में चिपक जाते है. और इन पर दबाव बनता है, साथ ही फॉल्ट लाइन के आसपास संग्रहीत तनाव ऊर्जा जमा होती रहती है. जब यह दबाव बहुत अधिक हो जाता है और एक सीमित वेल्यु पार कर जाती है तो घर्षण बल कमजोर हो जाता है. जिससे चिपकी हुई प्लेटों के बीच अचानक हलचल होती है, जिससे भ्रंश बनता है. भ्रंश के निर्माण के कारण पृथ्वी की सतह का हिंसक विस्थापन हो जाता है और तनाव ऊर्जा उत्पन्न होती है. यह ऊर्जा भूकंपीय तरंगों का कारण बनती है. जिस कारण हमे भूकंप के झटके महसूस होते है.

भूकंप के प्रकार (Types of Earthquake In Hindi)

भूकंप वैसे कई प्रकार के होते हैं जिनमे टेक्टोनिक भूकंप, ज्वालामुखीय भूकंप, संक्षिप्त भूकंप और विस्फोट भूकंप. भूकंप का प्रकार उसके क्षेत्र पर निर्भर करता है जहां पर भूकंप आता है और उस क्षेत्र की भूगर्भिक संरचना पर भी निर्भर करता है. जानते है इन सभी भूकंप के प्रकार के बारे में-

विवर्तनिक भूकंप (Tectonic Earthquake)

यह भूकंप सामान्य रूप आता रहता है. ये तब होते हैं जब पृथ्वी की सतह में मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने से जो ऊर्जा उत्पन होती है और उस ऊर्जा के बाहर निकलने से भूकंप जैसा महसूस होता है. उसे विवर्तनिक भूकंप कहते है.

ज्वालामुखीय भूकंप (Volcanic Earthquake)

ज्वालामुखीय भूकंप विस्फोट के पहले या बाद में आता है. यह आमतौर पर मैग्मा के ज्वालामुखी विस्फोट के कारण होता है. जो चट्टानों द्वारा सतह पर धकेल दिया जाता है.

संक्षिप्त भूकंप (Collapse Earthquake)

यह भूकंप भूमिगत गुफाओं और खानों में छोटे भूकंप के रूप में आता है. इस तरह के भूकंप के आने का मुख्य कारण चट्टानों के अंदर उत्पन्न प्रेशर हो सकता है.

विस्फोटक भूकंप (Explosion Earthquake)

यह भूकंप परमाणु और रासायनिक उपकरणों के विस्फोट से आता है. जो सामान्य रूप से मानव निर्मित गतिविधियाँ के कारण होता है.

भूकंप के प्रभाव (Effects of Earthquake In Hindi)

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है. यदि ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो यह लोगों और जगजीवन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. जिसकी हम कल्पना भी नही कर सकते है. लेकिन हम आपको भूकंप के प्रभावों से अवगत कराने जा रहे हैं जो इस प्रकार हैं:-

  • झटके लगना और धरती का फटना
  • भूस्खलन और हिमस्खलन होना
  • मिट्टी द्रवीकरण होना
  • बांध और ब्रिज के टूटने से बाढ़ आना
  • मानव के जीवन को प्रभावित करना
  • आग लगना
  • सुनामी आना

भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है? (How are Earthquakes Measured In Hindi)

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल से माप की जाती है. रिक्टर स्केल एक गणितीय पैमाना है जिसका उपयोग भूकंप तरंगों की तीव्रता को मापने के लिए किया जाता है. इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल (Richter magnitude scale) कहा जाता है. भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर उसके केंद्र से 1 से 9 तक मापी जाती है. यह पैमाना भूकंप के दौरान पृथ्वी के अंदर से निकलने वाली एनर्जी के आधार पर तीव्रता को मापता है.

भूकंप का केंद्र क्‍या होता है (Epicenter Of An Earthquake In Hindi)

भूकंप का केंद्र वह स्थान है जिसके ठीक नीचे प्लेटों की गति से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है. इस जगह पर भूकंप का प्रभाव सबसे अधिक होता है और कंपन भी सबसे तेज होता है. जैसे-जैसे कंपन की फ्रीक्वेंसी दूर होती जाती है ऐसे में इसका असर कम हो जाता है. लेकिन अगर रिक्टर पैमाने पर 7 से अधिक की तीव्रता वाला भूकंप आता है, तो 40 किमी के दायरे में झटके तेज हो जाते हैं. यह भूकंप की फ्रीक्वेंसी और रेडियस पर निर्भर करता है. यदि भूकंप की फ्रीक्वेंसी ऊपर की ओर है तो कम क्षेत्र पर प्रभाव पड़ेगा.

भूकंप से कैसे बचे (Stay Safe During An Earthquake In Hindi)

  • भूकंप के समय अगर आप घर में हैं तो जमीन पर बैठ जाएं या फिर किसी मज़बूत डेस्क या लकड़ी के फ़र्नीचर के नीचे बैठकर अपने सिर और चेहरे को अपने हाथों से ढक लें. जब तक झटके न रुके घर से बाहर न निकले
  • अगर रात के समय भूकंप आता है तो आप बिस्तर पर लेटे है तो सिर को तकिये से ढक लें और घर के सभी बिजली के स्विच बंद कर दें.
  • यदि आप भूकंप के दौरान मलबे के नीचे दब जाते हैं, तो अपने मुंह को रुमाल या कपड़े से ढक लें और मलबे के नीचे अपनी उपस्थिति का संकेत देने के लिए पाइप या दीवार को किसी चीज़ से बजाते रहें, ताकि बचाव दल आपको ढूंढ सके. अगर फिर भी आपको कुछ समझ नही आ रहा तो चिल्लाये लेकिन हिम्मत मत हारे.
  • भूकंप के समय अगर आप घर से बाहर हैं तो ऊंची बिल्डिंग और बिजली के खंभों से दूर रहें. यदि आप कार चला रहे हैं तो उसे किसी खाली जगह पर रोक दें लेकिन कार से बाहर न निकलें. ध्यान रहे किसी भी फ्लाईओवर पर कार न रोके.
  • भूकंप के दौरान यदि आप मलबे के नीचे दब जाते हैं, तो माचिस बिल्कुल न जलाएं. ऐसा करने पर इससे गैस रिसाव के कारण आग लगने का खतरा बढ़ सकता है.
  • भूकंप आने पर अगर आप घर पर हैं तो चलिए नही बल्कि सही जगह ढूंढकर बैठ जाओ या फिर किसी कोने में बैठ जाओ. ध्यान रहे कांच की खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें.
  • भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करे जहां तक हो सीढ़ियों का प्रयोग करे. भूकंप के दौरान घबराएं नहीं और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दे और न फैलाएं.

निष्कर्ष– आज के इस लेख में हमने आपको बताया भूकंप (Earthquake In Hindi) कैसे आता है, इसके आने के कारण और यह कितने  प्रकार के होते है. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी.

FAQ

Q : भूकंप क्या होता है?
Ans : पृथ्वी की सतह को हिलने को भूकंप कहते है.

Q : सबसे बड़ा भूकंप कब आया था?
Ans : सबसे बड़ा भूकंप 22 मई 1960 को साउथ अमेरिका के चिली में आया.

Q : भूकंप कितने प्रकार के होते हैं?
Ans : भूकंप 4 प्रकार के होते हैं, टेक्टोनिक भूकंप, ज्वालामुखीय भूकंप, संक्षिप्त भूकंप और विस्फोटक भूकंप.

Q : भारत में सबसे बड़ा भूकंप कब आया था?
Ans : साल 1934 में बिहार और नेपाल में आया था.

Q : भूकंप मापी यंत्र का नाम क्या है?
Ans : सिस्मोमीटर

यह भी पढ़े

Founder of Wonder Facts Hindi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here