केंद्र सरकार और राज्य सरकार में क्या अंतर है  | Difference Between Central Government And State Government In Hindi

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Central and State Government Kya Hoti Hai – केंद्र सरकार वह राजनीतिक शक्ति है जो देश या देश के भीतर किसी भी राज्य पर शासन करती है. राज्य सरकार वह है जो केवल एक राज्य पर शासन करती है. आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने वाले है केंद्र सरकार और राज्य सरकार में क्या अंतर है  (Difference Between Central Government And State Government In Hindi) के बारें में पूरी जानकारी.

Difference Between Central Government And State Government In Hindi

केंद्र सरकार क्या है (What is Central Government)

भारत का संविधान (The Constitution of India) संघात्मक शासन तंत्र पर आधारित है. संघात्मक शासन (Federal Government) उस शासन को कहते है जिसमें शासन चलाने के लिए दो सरकारें कार्य करती हैं और जिनमे संघ सरकार अधिक शक्तिशाली होती है. संघ सरकार इतनी शक्तिशाली होती है कि विशेष परिस्थितियों में यह राज्य की सभी शक्तियों को अपने अधीन करने की शक्ति रखती है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि देश की एकता और अखंडता के लिए कोई चुनौती नहीं बन पाएं. केंद्रीय शासन तंत्र के तीन विभाग है, कार्यपालिका (executive), विधायिका (Legislature) और न्यायपालिका (Judiciary).

कार्यपालिका के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व उनके अधीन आने वाले सभी कैबिनेट मंत्री है. विधायिका के अंतर्गत देश की संसद (Parliament) आती है, जो दो सदनों लोकसभा एवं राज्यसभा (Lok Sabha, Rajya Sabha) में विभक्त है. तीसरा प्रमुख विभाग है, न्यायपालिका का. भारत में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की व्यवस्था की गई है, जो देश के सभी राज्यों में स्थापित न्यायालयों का प्रधान होता है और जिसका न्याय सभी के लिए मान्य होता है. इस तरह से भारत में एक संघात्मक शासन की नीव रखी गई है.

भारत की शासन व्यवस्था का प्रकार कैसा है, इसकी जानकारी संविधान के अध्याय 5, 6 और 11 में दी गई है. संविधान का अध्याय 5 संघ की रूप रेखा का वर्णन करता है जबकि 6 राज्यों की शासन तंत्र से सम्बंधित है तो वही अध्याय 11 दोनों के लिए है, जो समवर्ती सूचि को इंगित करता है.

भारत में प्रत्येक पांच वर्षो के बाद देश में लोकसभा के सदस्यों को चुनने के लिए आम चुनाव होता है. इसमें देश की जनता अपने क्षेत्र के लिए एमपी (Members of Parliament) का चुनाव करते है. इस चुनाव में सभी राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा क्षेत्रीय पार्टियां भी अपने सदस्य मैदान में उतारती है. वे सभी पार्टियां जनता को अपने पक्ष में करने के लिए चुनाव घोषण पत्र जारी भी करते है, जिनमे वे जनता से लुभावने वादे करते है. जनता उन पार्टियों में अपनी पसंद के उम्मीदवार पर वोटिंग के दिन अपने अधिकारों का प्रयोग करके उन्हें चुनाव में जिताती है. बाद में, बहुमत के आधार पर अथवा संख्या बल के आधार पर राष्ट्रपति राजनीतिक पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण देता है और बहुमत का आकड़ा प्राप्त राजनीतिक पार्टी सत्ता संभालती है.

केंद्र सरकार की शक्तियां (Powers Of Central Government In India)

  • केंद्र सरकार के पास राष्ट्रीय सुरक्षा से सम्बंधित मामलो में राज्य के लिए निर्णय लेने की शक्ति है, जिसका वर्णन अनुच्छेद 352 से 360 में किया गया है.
  • कोई भी राज्य सरकार राज्यों के भीतर केंद्रीय सरकार की शक्ति में बाधाएं उत्पन्न नहीं कर सकता, जिसका वर्णन अनुच्छेद 357 में किया गया है.
  • केंद्र सरकार राज्यों के बीच व्यापार एवं विदेशी व्यापार को नियंत्रित करती है.
  • देश की रक्षा, विदेश नीति से सम्बंधित सभी निर्णय लेने का अधिकार केंद्र के पास है, राज्य इसमें न तो दखल दे सकता है और न ही किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न कर सकता है.
  • आश्यकता पड़ने पर या आपातकाल में केंद्र राज्य सरकार की सारी शक्तियां अपने अधीन ले शक्ति है, इसके लिए वह किसी भी समय अनुच्छेद 356 का अनुपालन से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है.

राज्य सरकार क्या है (What is State Government)

देश में राज्यों की शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार की व्यवस्था की गई है. इसके लिए राज्यों में विधानसभा बनाई गई है जिनका चुनाव प्रत्यक्ष विधि से प्रत्येक पांच वर्षो में होता है और जनता अपने क्षेत्र से विधायक (Member of Legislative Assembly (MLA) का चुनाव करती है. राज्य सरकार न केवल राज्यों का शासन चलाती है बल्कि वह अपने राज्यों के हितो का भी ध्यान रखती है और उसी के अनुरूप कानून भी बनाती है. ये कानून समवर्ती सूचि वाले विषय के होते है या फिर राज्य सूचि के विषय के. संविधान में इसका वर्गीकरण किया गया है. यदि समवर्ती सूचि के विषय पर केंद्रीय कानून बना हुआ है या फिर केंद्र कानून बना देता है तो वैसी स्थिति में यदि राज्यों में पहले से उस विषय पर कोई कानून बना है तो वह निरस्त हो जाता है, वैसी स्थिति में केंद्र द्वारा बनाये गए कानून ही मान्य होते है.

राज्यों में भी केंद्र की भांति कानून बनाने का अधिकार विधायिका शक्ति को दी गई है, जो विधान सभा के सदस्य होते है और जो प्रत्येक पांच वर्ष के बाद चुनकर आते है. इसी के आधार पर बहुमत के गणित पार करने पर राज्यों में सरकार का गठन होता है और मुख्यमंत्री व उनके सहयोगी मंत्रिमंडल शासन का बागडोर सँभालते है.

केंद्र सरकार और राज्य सरकार में अंतर

  • केंद्र समूचे देश की शासन व्यवस्था को संभालता है जबकि राज्य सरकार पर केवल राज्य की शासन व्यवस्था सँभालने की जिम्मेदारी होती है.
  • केंद्र और राज्य में के बड़ा अंतर कानून बनाने को लेकर है, केंद्र के पास कानून बनाने का विशेष अधिकार है.
  • जहाँ तक कर लगाने की बात है कर दोनों सरकार लगा सकती है मगर हाल ही में केंद्र सरकार जीएसटी लाकर राज्य सरकारों के इस अधिकार को भी सिमित कर दिया है.
  • केंद्र को संघ सूचि में शामिल विषयो पर कानून बनाने का अधिकार है. संघ सूचि में सौ से अधिक विषयो को शामिल किया गया है जो राष्ट्रीय हित से सम्बंधित है, इनमें रेलवे, डाक, रक्षा, विदेश, नागरिकता, विदेशी निवेश आदि महत्वपूर्ण बिषयो को शामिल किया गया है.
  • राज्य को राजकीय हित अर्थात क्षेत्रीय हितो को ध्यान में रखकर अपने लिए कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है, इनमें साठ से अधिक विषय शामिल है. इनमें मुख्यतः विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस सेवा, परिवहन सेवा, स्वास्थ्य, कृषि, चिकित्सा, आवास, पेयजल आदि सेवाओं को शामिल किया गया है.
  • समवर्ती सूचि में पचास से अधिक विषय शामिल है जिस पर दोनों सरकार कानून बना सकती है मगर यदि इस विषय पर केंद्र कानून बना देता है तो केंद्रीय कानून ही मान्य माना जाता है. इसके अंतर्गत जो प्रमुख विषय आते है उनमें श्रम कल्याण, बिजली, शिक्षा, वन-विभाग, जनसंख्या नियंत्रण, आपराधिक कानून आदि शामिल है.

भारत में संघात्मक शासन व्यवस्था है क्योकि यहाँ दो सरकारें कार्य करती है. सम्पूर्ण राष्ट्रीय हित से जुड़े हुए विषय पर केंद्र का नियंत्रण है तो वही राजकीय हितो की देखभाल का भार राज्यों पर है. दोनों सरकारें अपने – अपने अधिकार क्षेत्र के बिषय पर कानून बनाकर शासन व्यवस्था चलाती है मगर भारत में केंद्र सरकार को अधिक शक्ति दी गई है और आपातकाल में इसका स्वरुप संघात्मक न होकर एकात्मक हो जाता है.

निष्कर्ष – आज के इस लेख में हमने आपको केंद्र सरकार और राज्य सरकार में क्या अंतर है  (Difference Between Central Government And State Government In Hindi) के बारें में बताया. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी. अगर आपका कोई सुझाव है तो कमेंट करके जरूर बताइए. अगर आपको लेख अच्छा लगा हो तो रेटिंग देकर हमें प्रोत्साहित करें.

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