गामा पहलवान का जीवन परिचय | Gama Pahalwan Biography In Hindi

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देश में एक से बढ़कर एक पहलवान थे. लेकिन गूगल ने डूडल (Great Gama Google Doodle) बनाकर उनके जन्मदिन पर उन्हें सम्मानित किया है. मैं बात कर रहा हूँ भारत का नाम रोशन करने वाले एक महान पहलवान गामा पहलवान के बारें में. आज उनका 144वां जन्मदिन है इस मौके पर गूगल ने अपने खास तरीके से सम्मान दिया है. गामा पहलवान अपनी डाइट और वर्कआउट के लिए जाने जाते थे. वह एक दिन में 1000 से ज्यादा पुशअप और 5000 बैठक लगाया करते थे. उन्होंने वर्ल्ड रेसलिंग चैम्पियनशिप में भी हिस्सा लिया और कई ख़िताब भी अपने नाम किये है. तो आज के इस लेख में हम आपको गामा पहलवान का जीवन परिचय (Gama Pahalwan Biography In Hindi) के बारे में पूरी जानकरी देने वाले है.

Gama Pehalwan

गामा पहलवान का जीवन परिचय (Gama Pahalwan Biography In Hindi)

असली नाम (Real Name) गुलाम मोहम्मद बख्श बट
रिंग का नाम गामा पहलवान (Gama Pehalwan)
अन्य नाम  रुस्तम-ए-हिंद, रुस्तम-ए-जमां, द ग्रेट गामा
जन्म तारीख (Date Of Birth) 22 मई 1878
जन्मदिन (Gama Pehlwan Birthday) 22 मई
जन्म स्थान (Place) जब्बोवाल, अमृतसर
उम्र (Age) 82 वर्ष
धर्म (Religion) इस्लाम
मृत्यु की तारीख (Date of Death) 23 मई 1960
मृत्यु स्थान (Place Of Death) लाहौर, पाकिस्तान
मृत्यु का कारण (Death Cause) अस्थमा और हृदय रोग
व्यवसाय (Business) पूर्व भारतीय पहलवान
जाति कश्मीरी
नागरिकता (Nationality) भारतीय
राशि (Zodiac Sign) मिथुन
भाषा (Languages) हिंदी, पंजाबी
वैवाहिक स्थिति विवाहित
वजन 113 किलो
लम्बाई 5 फीट 7 इंच

कौन है गामा पहलवान (Who Is Gamma Wrestler)

गामा पहलवान का असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट है. और वह भारत के मशहूर पहलवान थे. इन्हें रुस्तम-ए-हिंद के नाम से भी जाना जाता था. गामा पहलवान ने आज तक कोई भी कुश्ती नही हारी यहाँ तक कि ब्रूस ली भी इनसे काफी प्रभावित थे. गामा पहलवान अपनी डाइट और कसरत के लिए काफी जाने जाते थे. उन्होंने विदेश में कई पहलवानों को धूल चटाई है. इनकी आखिरी फाइट 1927 में स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन से हुई थी.

गामा पहलवान का जन्म, परिवार (Gama Pahalwan Birth, Family)

गामा पहलवान का जन्म अमृतसर के जब्बोवाल गांव में 22 मई 1878 को हुआ था. इनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट (Ghulam Mohammad Baksh Butt) था. कुछ लोगो का कहना है कि इनका जन्म दतिया, मध्यप्रदेश हुआ था. उनके पिता का नाम मुहम्मद अजीज बक्श था और वो भी एक पहलवान थे. गामा पहलवान को बचपन से ही कुश्ती करने का काफी शौक था तो उन्होंने 10 वर्ष की उम्र में ही पहलवानी करना शुरू कर दिया था. पहलवानी के शुरुआती दांव-पेच अपने पिता से ही सीखे थे. पिता का निधन हो जाने के बाद दतिया, मध्य प्रदेश राजा भवानी सिंह ने गामा पहलवान को कुश्ती करने के लिए कई सुविधाएं दी. कम उम्र में ही कुश्ती में बड़े से बड़े पहलवान को धुल चटा देते थे. और धीरे धीरे भारत में अपना नाम रोशन करते चले गए. लेकिन भारत और पाकिस्तान बंटवारे के दौरान गामा पहलवान अपने परिवार संग लाहौर, पाकिस्तान चले गए थे.

गामा पहलवान का करियर (Gama Pahalwan Career)

कम उम्र में ही गामा पहलवान ने कुश्ती के दांव-पेच सीख लिए थे. कम उम्र होने के चलते भारत के कई बड़े से बड़े पहलवान को हरा देते थे. ऐसा कोई पहलवान नही था जो गामा को हरा सके. साल 1895 में भारत के सबसे बड़े पहलवान रहीम बख्श सुल्तानीवाला (Indian wrestler world champion) जिनकी लम्बाई 6 फीट 9 इंच थी उनसे मुकाबला हुआ था. यह कुश्ती बराबरी की थी लेकिन रहीम बख्श इस कुश्ती में हार गए और गामा पहलवान ने जीत गए. इस महामुकाबले के बाद गामा पहलवान को प्रसिद्धि मिली.

15 साल भारत के रेसलर्स को हराने के बाद साल 1910 में गामा पहलवान ने विदेशी पहलवानों के साथ एक एक हाथ करने की सोची. और अपने भाई इमाम बख्श के साथ इंटरनेशन कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेने ब्रिटेन चले गए. उनकी कम लम्बाई (5 फीट 7 इंच) होने के चलते इंटरनेशन कुश्ती चैंपियनशिप का हिस्सा नही बन सके. लेकिन उन्होंने हार नही मानी और ब्रिटेन में पहलवानों को फाइट की खुल्ली चुनौती देना शुरू किया. उन्होंने दावा किया कि किसी भी पहलवान को 30 मिनट में हरा सकते है. लेकिन किसी ने भी उनक चुनौती स्वीकार नही की.

गामा पहलवान ने ब्रिटेन के बड़े पहलवान फ्रेंक गॉच एवं स्टैनिसलॉस जेविस्को को चुनौती दी और कहा कि अगर मुझे हरा दोगे तो इनाम के रूप में पैसा दूंगा और वापिस अपने घर चला जाऊंगा. गामा पहलवान की चुनौती स्वीकार करने पहले अमेरिकी पहलवान बेंजामिन रोलर थे। गामा पहलवान ने 9 मिनट 10 सेकंड में बेंजामिन रोलर को पटक दिया. और दुसरे दिन उन्होंने 12 पहलवानों को और मात दी और इस तरह इंटरनेशन कुश्ती चैंपियनशिप टूर्नामेंट में प्रवेश मिल गया.

10 सितंबर 1910 को लंदन में जॉन बुल वर्ल्ड चैंपियनशिप में गामा पहलवान और विश्व चैंपियन स्टैनिसलॉस जेविस्को के बीच फाइट हुई और गामा पहलवान ने कुछ ही मिनट में धुल चटा दी और यह मुकाबला गामा पहलवान जीत गए. 17 सितंबर 1910 को जेविस्को और गामा के बीच एक बार फिर से मुकाबला होने वाला था लेकिन जेविस्को अखाड़े में ही नहीं पहुंचे थे और गामा को विजेता घोषित किया गया।

गामा पहलवान ने ब्रूस ली को भी चुनौती दी थी. जब पहली बार ब्रूस ली गामा पहलवान से मिले थे तो काफी प्रभावित भी हुए थे, जिसे देखकर ब्रूस ली ने गामा पहलवान से ‘द कैट स्ट्रेच’ सीखा था, जो योग पर आधारित पुश-अप्स का एक प्रकार है।

साल 1927 में  गामा पहलवान की आखिरी फाइट थी. उनका मुकाबला स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन के साथ थी। गामा पहलवान ने कुछ की समय में जेस पीटरसन को पस्त कर दिया।

गामा पहलवान की डाइट (Diet of Gama Pehlwan)

गामा पहलवान का वजन लगभग 113 किलो था और लंबाई 5 फीट 7 इंच की थी. गामा पहलवान गाँव के रहने वाले एक देसी इंसान थे. वह रोजाना 6 देसी मुर्गी खाया करते थे और 10 लीटर दूध पिया करते थे. इनकी डाइट में एक खास तरह का ड्रिंक भी शामिल था जिसमे 300 ग्राम बादाम से बनाया जाता था. इसके अलावा आधा किलो घी और 100 रोटी भी कहते थे.

गामा पहलवान की एक्सरसाइज (Workout of Gama Pehlwan)

गामा पहलवान रोजाना 5 हज़ार उठक-बैठक और 3 हज़ार पुश-अप लगाया करते थे. इसके अलावा डेली 40 पहलवानो के साथ कुश्ती किया करते थे. इसके अलावा रोजाना गामा पहलवान अपने गले से 54 किलो का पत्थर बांधकर भागा करते थे. इसके साथ ही गामा ने एक भारी भरकम डम्बल भी बना रखा था जिसे शायद किसी के उठा पाना मुश्किल था. 23 दिसंबर 1902 को गामा पहलवान ने सयाजीबाग में बड़ौदा संग्रहालय में रखा हुआ 1200 किलो का एक पत्थर को उठा लिया था.

गामा पहलवान को मिले अवार्ड (Gama Pahalwan Awards)

गामा पहलवान ने साल 1990 में वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियनशिप और साल 1927 में वर्ल्ड कुश्ती चैम्पियनशिप जीता. वर्ल्ड कुश्ती चैम्पियनशिप के बाद उन्हें ‘टाइगर’ की उपाधि से नवाज़ा गया. साल 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा के दौरान गामा पहलवान को एक चांदी की गदा भेंट की थी.

गामा पहलवान का निधन (Gama Pehalwan Death)

गामा पहलवान को हृदय रोग और अस्थमा सम्बंधित बीमारी कई दिनों से चल रही थी। उनकी हालत धीरे धीरे बिगड़ती जा रही थी। जिसके साथ ही आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा। इससे उभरने के लिए उन्होंने अपने सारे मैडल तक बेच दिए थे। लम्बी बीमारी के चलते 82 वर्ष की उम्र में 23 मई 1960 को लाहौर में उनका निधन हो गया।  

निष्कर्ष :- तो आज के इस लेख में आपने जाना गामा पहलवान का जीवन परिचय (Gama Pahalwan Biography In Hindi) के बारे में.

FAQ

Q : भारत में सबसे बड़ा पहलवान कौन सा है?
Ans : गामा पहलवान

Q : भारत का सबसे ताकतवर पहलवान कौन है?
Ans : गामा पहलवान

Q : गामा पहलवान की खुराक कितनी थी?
Ans : 6 देसी मुर्गी, 10 लीटर दूध, 300 ग्राम बादाम, आधा किलो घी और 100 रोटी

Q : गामा पहलवान ने कितने किलो का पत्थर उठाया था?
Ans : 23 दिसंबर 1902 को सयाजीबाग में बड़ौदा संग्रहालय में रखा 1200 किलो का एक पत्थर उठाया था.

Q : दारा सिंह गामा पहलवान में सबसे ताकत वाला कौन है?
Ans : गामा पहलवान

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मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

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