भारत के प्रधानमंत्री का चुनाव कैसे होता है?, Bharat Ke Pradhanmantri Ka Chunav Kaise Hota Hai

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भारत के प्रधानमंत्री का चुनाव कैसे होता है, कब होगा, कितने साल में होता है, किसके द्वारा होता है, शक्तियां, कार्य, अधिकार, योग्यता, कार्यकाल

prime minister election in india – भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और यहाँ संसदीय प्रणाली स्थापित है. यहाँ की शासन व्यवस्था जन प्रतिनिधियों के द्वारा नियंत्रित और कार्यान्वित होते है. शासन व्यवस्था में पंचायत स्तर से लेकर केंद्रीय स्तर तक लोकतान्त्रिक मापदंडो और नियमों का अनुपालन होता है. भारत में शासन का प्रधान राष्ट्रपति होता है. राष्ट्रपति ही सेना प्रमुख होता है पर व्यवहार में राष्ट्रपति के सभी अधिकारों का प्रयोग प्रधानमंत्री के द्वारा किया जाता है. राष्ट्रपति केवल संवैधानिक प्रधान होता है जबकि प्रधानमंत्री देश का वास्तविक शासक होता है. देश में जो भी प्रधानमंत्री होता है सरकार उसी की कहलाती है, जैसे मोदी सरकार आदि.

Bharat Ke Pradhanmantri Ka Chunav Kaise Hota Hai

देश में प्रधानमंत्री का चुनाव

भारत में प्रधानमंत्री का पद चुनाव के माध्यम से तय होता है. लेकिन भारत में प्रधानमंत्री का प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होता है अर्थात जनता सीधे किसी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को चुनकर नहीं भेजती है. हाँ, यह अलग बात है कि चुनाव पूर्व ही किसी पार्टी अथवा पार्टियों के समूहों के द्वारा किसी व्यक्ति को भावी या संभावित प्रधानमंत्री घोषित कर दिया हो मगर इसके बावजूद वह एक सामान्य तरीके से वैसे ही चुनाव लड़ेगा जैसे दूसरे लोक सभा के सदस्य चुनाव लड़ते है.

प्रधानमंत्री की नियुक्ति के लिए देश में प्रत्येक पांच वर्षो के बाद लोक सभा का चुनाव कराया जाता है. चुनाव कराने की व्यवस्था चुनाव आयोग के द्वारा की जाती है, जो बिना किसी भेदभाव के देश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए वचनवद्द होता है. वह सभी राजनैतिक पार्टियों के हितो की रक्षा करते हुए चुनाव का संपादन सुनिश्चित करता है. लोक सभा का चुनाव एक प्रत्यक्ष चुनाव है जिसमें देश के सभी वालिंग मतदाता भाग लेते है और अपने लिए पसदंदीदा उम्मीदवार को चुनने के लिए मतदान करते है.  चुनाव के बाद जो भी पार्टी अथवा अलाइंस उसमे विजय होती है उनके नेता को सर्वसम्मति से आगामी सरकार को गठित करने का अवसर प्रदान किया जाता है. इसके बाद वे संविधान के नियमानुसार राष्ट्रपति बहुमत दल या अलाइंस के मुखिया को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करता है.

लोक सभा के लिए अधिकतम संख्या 550 सदस्यों निश्चित की गई है जिनमें वर्तमान में निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या 543 है. अब यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि जब किसी पार्टी को या अलाइंस को आसानी से बहुमत मिल जाती है तब यह गणित सुलभ लगता है मगर जब चुनाव के बाद किसी भी पार्टी या अलाइंस को बहुमत हासिल नहीं होती है तब उस स्थिति में राष्ट्रपति अपने विवेक का प्रयोग कर सकता है. वैसी स्थिति में राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित कर सकता है. अब अगर किसी कारण से वह पार्टी सरकार बनाने से मना कर दें तो उस परिस्थिति में राष्ट्रपति दूसरे प्रमुख दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है. भारत में ऐसा कई बार हो चुका है जब राष्ट्रपति के सामने ऐसी कठिन परिस्थिति उत्पन्न हुई थी. संविधान के अनुच्छेद 75 में यह बताया गया है कि राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा.

राष्ट्रपति के द्वारा सरकार बनाने के निमंत्रण के बाद लोक सभा के बहुमत दल का नेता प्रधानमंत्री पद की शपथ लेता है. उसके साथ अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते है. चूँकि प्रधानमंत्री अपने सहयोग के लिए एक मंत्रिमंडल का भी गठन करता है और वह उसका प्रधान होता है.

प्रधानमंत्री के अधिकार और कार्य (Prime Minister Work and Power)

  • वह देश का वास्तविक शासक होता है. देश चलाने, देश का विकास करने एवं देश की रक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का सम्पूर्ण भार उसी के कंधे पर होता है.
  • वह मंत्रिमंडल का मुखिया होता है. वह कभी भी किसी भी समय मंत्रिमंडल में फेर बदल कर सकता है.
  • प्रधानमंत्री ही मंत्रियों के विभागों का बँटबारा करता है. इसके साथ ही वह किसी भी मंत्री के कार्य में दखल दे सकता है अर्थात वह सभी विभागों का प्रधान होता है.
  • इसके अलावा वह लोक सभा का भी नेता होता है.
  • वह देश का एक लोकप्रिय नेता होता है क्योकि उसी के दम पर पार्टी या अलाइंस चुनाव में जीत हासिल करती है.
  • प्रधानमंत्री की शक्ति का अनुमान केवल इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार उसी के नाम से कहलाती है, जैसे मोदी सरकार, राजीव सरकार, इंदिरा सरकार आदि.
  • प्रधानमंत्री अपना त्यागपत्र समय से पूर्व भी दे सकता है. वह अपना त्यागपत्र सीधे राष्ट्रपति के पास जाकर उसे सौंप सकता है.
  • प्रधानमंत्री के त्यागपत्र के साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल स्वतः भंग हो जाता है.
  • लेकिन प्रधानमंत्री के त्यागपत्र के साथ ही लोक सभा भी भंग होगी, ऐसा प्रावधान नहीं है. प्रधानमंत्री के त्यागपत्र के बाद भी लोकसभा भंग नहीं होती है. इससे केवल सरकार गिरती है, लोकसभा सुरक्षित रहती है.
  • इसके अलावा यदि प्रधानमंत्री की आकस्मिक निधन हो जाएं तो वैसी स्थिति में भी मंत्रिमंडल स्वतः भंग मान लिया जाता है.
  • प्रधानमंत्री न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भी देश के मुखिया के तौर पर भाग लेता है और देश के हित में निर्णय लेता है.
  • सरकार चलाने के दौरान प्रधानमंत्री के द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय अंतिम होता है, मंत्रिमंडल का अन्य सदस्य उसे बदल नहीं सकता है. हाँ, प्रधानमंत्री अपने निर्णय को स्वयं कभी भी बदल सकता है, जैसे 2021 में किसान आंदोलन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में विरोध के बाद अपने ही द्वारा घोषित तीनो कृषि कानूनों को वापस ले लिया था.
  • इस प्रकार प्रधानमंत्री देश का सर्वेसर्वा होता है.

प्रधानमंत्री को हटाने की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतान्त्रिक है. जब विपक्ष को लगता है कि प्रधानमंत्री लोकसभा में अपना विश्वास मत खो चुका है तब वह प्रधानमंत्री के त्यागपत्र का दवाव डाल सकता है. इसके लिए लोक सभा में सदस्यों के बीच मतदान कराया जा सकता है. मतदान के बाद यदि लोकसभा में प्रधानमंत्री अपना विश्वास खो चुका होता है तो उसे तत्काल त्यागपत्र देना होता है जैसा कि 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के साथ हुआ था. अटल बिहारी को केवल एक वोट कम होने के कारण प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा था और उनकी सरकार मात्र 13 दिन में ही गिर गई थी.

प्रधानमंत्री बनने की योग्यता (Eligibility for PM)

देश का कोई भी आम नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है. वह लोक सभा का चुनाव लड़कर इसके लिए दावेदारी पेश कर सकता है. इतना ही नहीं कोई ऐसा व्यक्ति जिसने चुनाव नहीं भी लड़ा हो उसे भी विशेष परिस्थिति में प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है, जैसे 1991 में हुआ था, जब देश में हो रहे उस आम चुनाव के दौरान राजीव गाँधी की हत्या हो गई थी, तब वरीयता के आधार पर नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बना दिया गया था जबकि अस्वस्थ्य होने के कारण उन्होंने उस बार का चुनाव भी नहीं लड़ा था और वे राजनीति से सन्यास लेकर घर लौटने का निर्णय ले लिया था. लेकिन जब उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया तब वे बाद में आंध्रप्रदेश की नांदयाल सीट से उपचुनाव लड़ा था और विजय रहे थे.

निष्कर्ष :- तो आज के इस लेख में आपने जाना भारत के प्रधानमंत्री का चुनाव कैसे होता है के बारे में. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी. अगर आपका कोई सुझाव है तो कमेंट करके जरूर बताइए. अगर आपको लेख अच्छा लगा हो तो रेटिंग देकर हमें प्रोत्साहित करें.

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