रॉयल एनफील्ड की सफलता की कहानी | Royal Enfield Success Story In Hindi

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डुग डुग डुग जब यह आवाज कान में सुनाई देती है तो आस पास के लोगों की निगाहे खुद-ब-खुद पहचान लेती है कि ‘बुलेट’ आ रही है. इसकी सवारी करना कई लोगो का सपना होता है और कई लोगो का कहना है कि गाड़ी होतो ‘बुलेट’ वरना न हो. 60 सालों से इसकी आवाज बाइक लवर्स के जेहन में बसी हुई है. एक समय ऐसा था जब  बुलेट की कंपनी इसे बंद करना चाहती थी लेकिन एक इंसान ऐसा आया जिसने इसे आसमान की ऊंचाई में तक पहुंचाया. और सभी के दिलों में रॉयल एनफील्ड की बाइक्स का नाम को पहचाना बनाया. दरअसल बुलेट ब्रिटिश आर्मी के लिए बनकर तैयार हुई थी. जिसके बाद बुलेट को रशियन सरकार ने अपनी आर्मी के लिए भी खरीदा. लेकिन कुछ समय बाद यह कंपनी दिवालिया हो गई.

आज हम आपको रॉयल एनफील्ड की सफलता की कहानी (Royal Enfield Story In Hindi ) के बारें में बताएँगे कि एक समय में जहां इसका सफ़र ख़त्म होने की कगार पर था सिर्फ दो साल में एक शख्स ने कैसे बदल दी कहानी.

Royal Enfield Success Story In Hindi

रॉयल एनफील्ड की सफलता की कहानी (Royal Enfield Success Story In Hindi)

उद्योग (Industry) मोटर वाहन
कंपनी Company) आयशर मोटर्स (Eicher Motors)
सीईओ (CEO) सिद्धार्थ लाल
स्थापित  (Founded) 1955
संस्थापक (Founders) अल्बर्ट एडी, रॉबर्ट वाकर स्मिथ
मुख्यालय (Headquarters) चेन्नई, भारत
उत्पाद (Products) रॉयल एनफील्ड बुलेट, रॉयल एनफील्ड क्लासिक, रॉयल एनफील्ड थंडरबर्ड, रॉयल एनफील्ड उल्का 350, रॉयल एनफील्ड हिमालयन स्क्रैम 411, रॉयल एनफील्ड हिमालयन, रॉयल एनफील्ड इंटरसेप्टर 650, रॉयल एनफील्ड कॉन्टिनेंटल जीटी
प्लांट (Store) तमिलनाडु, अर्जेंटीना
उत्पादन (Production) 846,000 यूनिट (2018)
आय (Revenue) 8,965.00 करोड़ (2018)

एनफील्ड का इतिहास (Enfield History in Hindi)

1891 – बॉब वॉकर स्मिथ और अल्बर्ट एडी ने जॉर्ज टाउनसेंड एंड कंपनी ऑफ़ हंट एंड, रेडडिच को खरीदा. टाउनसेंड कंपनी तक़रीबन 50 साल पुरानी सुई निर्माता कंपनी है जिसने साइकिल बनाने का काम शुरू किया था.

1893 – बॉब वॉकर स्मिथ और अल्बर्ट एडी को रॉयल स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री ऑफ एनफील्ड का कांट्रेक्ट मिला. इस नाम को बदलकर एनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड कर दिया. यहाँ पर बॉब वॉकर स्मिथ द्वारा डिजाइन की गई पहली साइकिल को एनफील्ड नाम दिया गया. और एक साल बाद साइकिल का नाम बदलकर रॉयल एनफील्ड कर दिया गया.

1898 – बॉब वॉकर ने पहली मोटर से चलने वाली क्वाड्रिसाइकिल का निर्माण किया. जिसे दो मजबूत फ्रेम से बनाया गया है और इसमें 11/2 एचपी डी डायोन इंजन का उपयोग किया गया. इसके बाद कंपनी ने अपने नाम को द एनफील्ड साइकिल कंपनी लिमिटेड कर दिया.

1901 – पहली बार साल 1901 में रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल (क्वाड्रिसाइकिल) का प्रोडक्शन शुरू किया गया है जिसे लंदन में स्टेनली साइकिल शो में लॉन्च किया गया है.

1914 – रॉयल एनफील्ड का पहला 2-स्ट्रोक मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन साल 1914 में शुरू हुआ. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान कंपनी ने ब्रिटिश, बेल्जियम, फ्रेंच, अमेरिका और इंपीरियल रूसी सेनाओं के लिए 770cc 6 hp V-twin मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन शुरू किया.

1924 – पहली रॉयल एनफील्ड के रूप में स्पोर्ट्स 351 जो कि 350cc OHV 4-स्ट्रोक मोटरसाइकिल थी जो पैर से गियर बदलने वाली थी.

1930 – इस साल की शुरुआत में 225 सीसी 2-स्ट्रोक, 350 और 500 सीसी के इंजन वाली रॉयल एनफील्ड का निर्माण शुरू किया.

1932 – इस साल दुनिया की लीजेंड ‘बुलेट’ मोटरसाइकिल का जन्म हुआ. इसे पहली बार नवंबर 1932 में लंदन में ओलंपिया मोटरसाइकिल शो में प्रदर्शित किया गया. इसमें तीन मॉडल 250, 350 और 500cc का निर्माण किया गया.

1939-1945 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आर्मी के लिए बड़ी मात्र में मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन किया गया. सबसे ज्यादा प्रोडक्शन 125cc ‘एयरबोर्न’ मोटरसाइकिल का हुआ जिसे फ्लाइंग फ्ली के नाम से भी जाना जाता है।

1949 – इस साल 350cc बुलेट और 500 cc ट्विन मॉडल यूके में लॉन्च किए गया. दोनों बाइक्स में एक जैसा फ्रेम, स्विंगिंग आर्म सस्पेंशन, टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और गियरबॉक्स है. सुंदरम अय्यर ने रॉयल एनफील्ड सहित भारत में ब्रिटिश मोटरसाइकिलों को इम्पोर्ट करने के लिए मद्रास मोटर्स को लॉन्च किया.

1952 – मद्रास मोटर्स को भारतीय सेना से 500 और 350cc बुलेट का ऑर्डर मिला. मोटरसाइकिल 1953 की शुरुआत में इंग्लैंड में रेडडिच कंपनी से आती थी.

1955 – रेडडिच कंपनी ने ‘एनफील्ड इंडिया’ बनाने के लिए भारत में मद्रास मोटर्स के साथ पार्टनरशिप की है। मद्रास के पास तिरुवोट्टियूर में एनफील्ड की फैक्ट्री को बनाने का काम शुरू किया गया.

1956 – चेन्नई के तिरुवोट्टियूर फैक्ट्री में बुलेट का निर्माण शुरू हुआ. शुरुआत में बुलेट के कुछ पार्ट तो इंग्लैंड से तैयार होकर भारत लाया जाता है. और मद्रास में असेंबल किया जाता है. कुछ सालों बाद पूरा काम मद्रास मोटर्स फैक्ट्री में होने लगा. और हर साल यहाँ 163 बाइक बनकर तैयार होने लगी.

1967 – इस साल की शुरुआत में कंपनी के पास सिर्फ दो मॉडल बचे हैं 250cc कॉन्टिनेंटल GT और 736cc इंटरसेप्टर. रेडडिच कंपनी इन दोनों मॉडल की सर्विस देना बंद कर देती है और जून 1970 में दोनों मॉडल का प्रोडक्शन बंद हो जाते है.

1977 – एनफील्ड इंडिया ने 350cc Bullet को यूके और यूरोप में एक्सपोर्ट करना शुरू किया. और  बिक्री तेजी से बढ़ती गई क्योंकि क्लासिक मोटरसाइकिल लोगों की पहली पसंद थी.

1989 – इस साल 500 सीसी बुलेट लांच हुई. इसके तीन वेरिएंट क्लासिक, डीलक्स और सुपरस्टार ट्रिम थे.

1993 – इस साल एनफील्ड इंडिया ने 325cc  का डीजल इंजन मोटरसाइकिल बनाना शुरू किया.

1994 – इस साल कमर्शियल व्हीकल और ट्रैक्टर निर्माता द आयशर ग्रुप ने एनफील्ड इंडिया लिमिटेड का अधिग्रहण किया. इसने कंपनी का नाम बदलकर रॉयल एनफील्ड मोटर्स लिमिटेड कर दिया।

2001 – 350 सीसी बुलेट्स पर इंडियन आर्मी के 201 जवानों ने एक मानव पिरामिड बनाकर 200 मीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए नया विश्व रिकॉर्ड बनाया.

2002 – इस साल कंपनी ने थंडरबर्ड, एक स्टाइलिश लीन बर्न क्रूजर लॉन्च किया.  इसमें 1960 के दशक के बाद से रॉयल एनफील्ड पर इस्तेमाल किया जाने वाला पहला 5-स्पीड गियरबॉक्स है.

2004 – इलेक्ट्रा एक्स, ऑल-अलॉय लीन बर्न 500cc इंजन के साथ मार्किट में लांच हुई. और इसे टीएनएस ऑटोकार सर्वे में ‘नंबर 1 क्रूजर’ का दर्जा दिया गया है.

2008 – थंडरबर्ड ट्विनस्पार्क को भारत में नए यूनिट कंस्ट्रक्शन इंजन के साथ लॉन्च किया गया.

2009 – 500cc का यूनिट कंस्ट्रक्शन इंजन भारत में लॉन्च हुआ.  रेट्रो-स्टाइल क्लासिक की बिक्री तेजी से बढ़ गई.

2012 – रॉयल एनफील्ड ने अपना पहला हाईवे क्रूजर, ऑल-ब्लैक थंडरबर्ड 500 लॉन्च किया. तमिलनाडु के ओरगडम फैक्ट्री में यह काम तेज़ी से चल रहा था. और तिरुवोट्टियूर प्लांट ने 113,000 मोटरसाइकिल की सेल को पूरा करने के लिए एक नया प्रोडक्शन रिकॉर्ड बनाया है.

2013 – रॉयल एनफील्ड ने ऑल-न्यू कॉन्टिनेंटल जीटी को रोल आउट किया. इसमें हैरिस परफॉर्मेंस और 535cc UCE इंजन दिया गया.

2014 – रॉयल एनफील्ड ने दिल्ली के खान मार्केट में अपना पहला विशेष गियर स्टोर शुरू किया.

2016 – रॉयल एनफील्ड ने अपनी पहली एडवेंचर मोटरसाइकिल हिमालयन 411cc में लॉन्च किया

2017 – रॉयल एनफील्ड का चेन्नई के पास वल्लम वडागल में स्थित एक प्लांट में प्रोडक्शन शुरू हुआ. नई 650cc रॉयल एनफील्ड इंटरसेप्टर और कॉन्टिनेंटल जीटी लांच की गई और कंपनी ने अपना पहला कैफे, रॉयल एनफील्ड गैराज कैफे, बागा, गोवा में खोला.

2020 – रॉयल एनफील्ड का 500cc UCE इंजन का प्रोडक्शन समाप्त हो गया है. Meteor 350 क्रूजर को भारत में लॉन्च किया गया है. इसमें बिल्कुल नया चेसिस और इंजन है और इसमें नया रॉयल एनफील्ड ट्रिपर टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन डिवाइस है.

कब शुरू हुआ बुलेट का सफर

साल 1949 से रॉयल एनफील्ड की बाइक्स भारत में बिक रही है. इंडियन गवर्मेंट ने साल 1954 में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर आर्मी की पेट्रोलिंग के लिए ब्रिटेन की एनफील्ड साइकिल कंपनी को 800 ‘बुलेट 350’ मोटरसाइकिल का ऑर्डर दिया था. बताया जाता है कि उस समय का यह सबसे बड़ा ऑर्डर था. मोटरसाइकिल को तैयार करने का काम रेडिच प्लांट में शुरू किया गया. और भारत में ‘बुलेट 350’ का सफ़र यहाँ से शुरू होता है. फिर साल 1955 में ब्रिटेन की रेडिच कंपनी ने भारत में स्थित मद्रास मोटर्स के साथ मिलकर बुलेट 350 cc एसेंबलिंग करने के लिए ‘एनफील्ड इंडिया’ कंपनी बनाई. लेकिन इसका मालिकाना हक़ तो ब्रिटेन के पास ही था. फिर साल 1994 में ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी आयशर मोटर्स ने ‘एनफील्ड इंडिया’ को खरीद लिया और इसका नाम बदलकर रॉयल एनफील्ड मोटर्स लिमिटेड कर दिया गया. ब्रिटिश कंपनी में इसका मैन्युफैक्चरर्स बंद कर दिया था तो आयशर मोटर्स ने यूरोपीयन देशो से इसका एक्सपोर्ट शुरू किया. लेकिन कुछ समय बाद इंग्लैंड में आयशर मोटर्स के सहयोग से फिर से प्रोडक्शन शुरू हुआ. और आज दुनियाभर 60 देशों में रॉयल एनफील्ड की डीलरशिप और स्टोर है.

दिवालिया के बाद कैसे बदली 2 साल में रॉयल एनफील्ड की कहानी

एक समय रॉयल एनफील्ड दिवालिया होने की कगार पर थी. लगभग इसे बंद करने की पूरी तरह से नौबत आ गई थी. लेकिन जनवरी 2004 में ट्रेक्टर बनाने वाली आयशर कंपनी के मालिक विक्रम लाल के बेटे सिद्धार्थ लाल ने इसकी कमान संभाली और आयशर मोटर्स के सीईओ बने. उस वक्त इनकी कंपनी लगभग 15 तरह के अन्य बिजनेस देख रही थी. लेकिन सिद्धार्थ ने कड़े फैसले लेते हुए 13 बिजनेस को बंद किया और पूरा ध्यान रॉयल एनफील्ड पर लगाया. सबसे पहले उन्होंने जयपुर स्थित रॉयल एनफील्ड का प्लांट बंद किया. सभी तरह के डीलर डिस्काउंट ख़त्म किया. एनफील्ड की पोपुलारिटी को बढाने के लिए मार्केटिंग और रिटेल आउटलेट पर फोकस किया. कस्टमर्स के बेहतर एक्सपीरियंस के लिए आउटलेट्स की शुरुआत की. सिद्धार्थ ने कहा कि दुसरे फ़ील्ड में उतरने से बढ़िया है इसी फ़ील्ड में अच्छे से काम किया जाये. अगर इस मोटरसाइकिल का कोई मार्किट भी नही है तो इसे हमे बनाना है फिर चाहे इसे बनाने में 10 साल ही क्यों न लग जाये.

सिद्धार्थ ने हार्ले डेविडसन के पूर्व मैनेजर रोड रोप्स को लाये और नॉर्थ अमेरिका का प्रेसिडेंट नियुक्त किया. इसके अलावा डुकाटी में काम करने वाले डिजाईनर पीरे टेर्ब्लांच को अपने साथ जोड़ा. इतना ही नही इन्होने ट्रायम्फ के हेड और प्रोडक्ट प्लानिंग एंड को अपनी टीम में शामिल किया.

सिद्धार्थ ने रॉयल एनफील्ड की बनावट को थोडा बदला. इन्होने 21 से 35 साल की उम्र वाले युवा और बाइकर्स को टारगेट किया. इन्होंने युवाओं का खास ध्यान रखते हुए बुलेट, रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350, हिमालयन स्क्रैम 411, हिमालयन, इंटरसेप्टर 650, कॉन्टिनेंटल जीटी के वैरिएंट निकाले. इनमे रंगों का भी खासा ध्यान दिया गया है. सिर्फ दो साल में सिद्धार्थ ने इसे फिर से मार्किट में खड़ा किया. साल 2012 में 81 हज़ार, 2013 में 1 लाख 23 हज़ार और 2018 में 3 लाख 54 हज़ार मोटरसाइकिलें बेची गई. और इस साल रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल ऑफ़ द ईयर चुनी गई.  साल 2015 में बिक्री के मामले में हार्ले डेविडसन को पीछे पछाड़ दिया था. साल 2021-2022 में रॉयल एनफील्ड की 5 लाख से ज्यादा बाइक बिकी.

निष्कर्ष– आज हमने आपको रॉयल एनफील्ड की सफलता की कहानी  (Royal Enfield Success Story In Hindi) के बारे में बताया, उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी.

FAQ

Q:  रॉयल एनफील्ड का मालिक कौन है?
Ans: आयशर मोटर्स

Q:  रॉयल एनफील्ड कौन से देश की कंपनी है?
Ans: भारत की

Q:  बुलेट का आविष्कार कब हुआ था?
Ans: साल 1949 ब्रिटेन में

Q:  बुलेट कौन कंपनी बनाती है?
Ans: आयशर मोटर्स

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