आसाराम बापू का जीवन परिचय | Asaram Bapu Biography in Hindi

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Asaram Bapu News – आसाराम को देश और दुनिया में कौन नहीं जानता है. हर बच्चा उससे वाकिफ है. पहले उनकी छवि संत के रूप में थी, लेकिन आज वे बलात्कार के अपराध में सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं. आसाराम की जिंदगी काफी रहस्यमयी तरीके से थी. बंटवारे के बाद पाकिस्तान से एक लड़का कैसे अहमदाबाद पहुंचा और साइकिल का काम करते-करते आसुमल थाउमल हरपलानी से आसाराम बापू बन गए. लोगों को प्रवचन देते हुए उन्हें इतनी प्रसिद्धि मिली कि वे लोगों के संत श्री आसाराम जी बापू बन गए. और धीरे धीरे कैसे दस्ता चला गया आसाराम का साम्राज्य. भारत और विदेश के कई देशों में अपने प्रवचन और सत्संग के जरिए वेदांत, अध्यात्म, भक्ति और मुक्ति का प्रचार किया. आसाराम की संस्था पिछले कई सालों से आध्यात्मिकता और जनसेवा का काम कर रही थी. दुनिया भर में इनके 400 से अधिक आश्रम है और 400 ट्रस्ट है. इन ट्रस्टों से करोड़ों रुपए आते थे। आसाराम हर साल गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु दक्षिणा कार्यक्रम आयोजित करता था, जिसमें लाखों लोग भेंट के रूप में बड़ी रकम देते थे. आज के इस लेख में हम आपको आसाराम बापू का जीवन परिचय (Asaram Bapu Biography in Hindi) के बारे में पूरी जानकरी देने वाले है.

Asaram Bapu Biography in Hindi

आसाराम बापू का जीवन परिचय (Asaram Bapu Biography in Hindi)

नाम (Name) आसाराम बापू (Asaram Bapu)
असली नाम (Asaram Bapu Real Name) आसुमल थाउमल सिरुमलानी हरपलानी
जन्म तारीख (Date Of Birth) 17 अप्रैल 1941
जन्म स्थान (Place) नवाबशाह, सिंध प्रान्त, पाकिस्तान
उम्र (Asaram Bapu  Age) 81 साल (2023)
धर्म (Religion) हिन्दू
व्यवसाय  (Occupation) संत और बहुत सी संस्थाओं का संचालन
स्कूल (School) जयहिन्द हाईस्कूल, मणिनगर
नागरिकता (Nationality) भारतीय
राशि (Zodiac Sign) सिंह
भाषा (Languages) हिंदी, इंग्लिश, गुजराती
वैवाहिक स्थिति (Marital Status) शादीशुदा
संपत्ति (Net Worth ) 2300 करोड़ रुपये 
गुरु (Teacher) लीलाधर शाह

कौन है आसाराम बापू (Who is Asaram Bapu)

आसाराम एक भारतीय आध्यात्मिक सन्त, गुरु और उपदेशक है. उनके भक्त उन्हें  बापू कहकर पुकारते है. देश दुनिया में इनके 400 से ज्यादा छोटे बड़े आश्रम है. और 400 ट्रस्टों के तहत करोड़ो की कमाई होती है, वर्ष 1980 से 2008 तक उन्होंने बहुत अच्छा जीवन व्यतीत किया है. लेकिन अगस्त 2013 में यूपी की एक नाबालिक लड़की ने इन पर आरोप लगाया कि आसाराम ने जोधपुर के अपने एक आश्रम में उसका बलात्कार किया. आसाराम के खिलाफ दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी और इस एफआईआर को दिल्ली पुलिस ने जोधपुर ट्रांसफर कर दिया था. और अप्रैल 2018 में, अदालत ने आसाराम को एक नाबालिग से बलात्कार का दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. और तब से लेकर आज तक आसाराम जोधपुर जेल में बंद है.

आसाराम बापू का जन्म और परिवार (Asaram Bapu Birth &Family)

आसाराम का जन्म आजादी से पहले 17 अप्रैल 1937 सिंध प्रान्त के नवाबशाह जिले में सिंधु नदी के सटे एक गाँव बेराणी में हुआ. आसाराम का असल नाम आसुमल सिरुमलानी हरपलानी हैं. इनके पिता का नाम थाउमल सिरुमलानी और माता का नाम मेहानगिबा है. आसाराम की बचपन से ही रूचि आध्यात्मिक ज्ञान की ओर था. और उनकी मां उन्हें पौराणिक कथाओं के साथ-साथ भगवद गीता और रामायण भी सुनाया करती थीं.

बंटवारे के समय आसाराम का परिवार पाकिस्तान के सिंध प्रांत से गुजरात के अहमदाबाद के मणिनगर में आकर रहने लग गए थे. और यहीं से उन्होंने अपने भावी जीवन की शुरुआत की.

आसाराम की शादी लक्ष्मी देवी से हुई थी उस वक्त उनकी उम्र 23 साल थी. इनसे इनके एक बेटा और एक बेटी है. बेटे का नाम नारायण साईं है जो इस समय सुरत की एक जेल में बंद है. और बेटी का नाम भारती देवी है. 

आसाराम बापू का परिवार (Asaram Bapu family Information)

पिता का नाम (Asaram Bapu Father Name) थाउमल सिरुमलानी
माता का नाम (Asaram Bapu Mother Name) महँगीबा
पत्नी का नाम  (Asaram Bapu Wife Name) लक्ष्मी देवी
बच्चे (Asaram Bapu Children) एक बेटा और एक बेटी
बेटी का नाम (Asaram Bapu Son) भारती देवी
बेटों के नाम (Asaram Bapu Daughter) साईं नारायण

आसाराम बापू की शिक्षा (Asaram Bapu Education Qualification)

आसाराम की प्रारंभिक शिक्षा सिंध में हुई, जिसके बाद उन्होंने अहमदाबाद के जयहिंद हाई स्कूल में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू की. बचपन से ही आसाराम की पढाई में अधिक रूचि थी. स्कूल में लंच के दौरान जब सभी बच्चे खेल रहे होते थे तब आसाराम स्कूल के प्रांगण में एक पेड़ के नीचे बैठकर ध्यान किया करता था. उन्हें इस अवस्था में देखकर स्कूल के शिक्षक भी उसे बुद्धिमान समझकर प्रोत्साहित करते थे. क्लास में जब टीचर द्वारा कोई कविता, गीत या फिर कोई अन्य अध्याय के बारें में पढाया जाता था तो आसाराम भी पूरा का पूरा याद कर टीचर को सुना दिया करते थे. आसाराम सिर्फ तीसरी कक्षा तक ही पढ़े हुए है.

आसाराम बापू का प्राम्भिक जीवन (Asaram Bapu Early Life)

आसाराम बचपन से ही तेज बुद्धि के थे. स्कूल और घर में उनका स्वभाव काफी सरल था। अपने पिता के पैर दबा कर उनकी मालिश करते थे और जब वे ध्यान में बैठते थे तो उनकी माता उन्हें माखन मिश्री खिलाती थी.

आसाराम के पिता का लकड़ी और कोयलों का व्यापार था. जब आसाराम छोटे थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया। परिवार की जिम्मेदारी उनके सिर पर आ गई और उन्होंने अपने पिता के कामकाज को देखना शुरू कर दिया.

आसाराम कभी साइकिल की दुकान पर काम करते थे तो कभी तांगा भी चलाते थे. और यहीं से धीरे-धीरे उनके कदम आध्यात्मिक गुरु की ओर बढ़ने लगे. पिता के इस तरह से चले जाने पर उन्होंने अपना सारा वक्त आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान की और लगा दिया. और खुद को ईश्वर की खोज के लिए समर्पित कर दिया

जब तक आसाराम युवावस्था में पहुंचे, तब तक उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्तियों में काफी वृद्धि कर ली थी, जिसका असर उनके आसपास के लोगों पर भी पड़ने लगा था. आसाराम के इस रास्ते पर चलने से उसके परिवार को चिंता होने लगी कि कहीं वह साधु न बन जाए. तो उन्होंने उनके लिए लड़की देखकर सगाई कर दी और शादी की तारीख तय कर दी. लेकिन शादी के 8 दिन पहले आसाराम अपने घर से भाग निकले. किसी को कानोंकान खबर नही हुई की आसाराम कहा पर है. लेकिन कुछ समय बाद उनके परिवार को वह भरूच के अशोक आश्रम मिले. उसके घर वाले उसे जबरदस्ती घर ले आए और उसकी शादी लक्ष्मी देवी से करा दी.

शादी के बाद आसाराम ने अपनी पत्नी को समझाया कि उसका जीवन गृहस्थी के लिए नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से कुछ करने के लिए है. उन्होंने आध्यात्मिक पुस्तकों को समझने के लिए एक संस्कृत विद्यालय में दाखिला लिया और परीक्षा से पहले उन्होंने श्लोक सुना और उनका जीवन ईश्वर की खोज में निकल पड़ा. इसके बाद वे अपना परिवार और सब कुछ छोड़कर संत के मार्ग पर चल पड़े.

कैसे बने आसुमल से आसाराम बापू  (Asumal to Asaram Bapu)

घर-परिवार को छोड़कर आसाराम घने जंगलों और पहाड़ों की गुफाओं में साधना करने लगे. देश के कई बड़े मंदिरों में गए. जहाँ केदारनाथ में उन्हें एक संत द्वारा करोड़पति बनने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ. आसाराम ने कुछ दिन वृंदावन में बिताए और वहां 45 दिन रहे. वह पर उन्होंने स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज आशीर्वाद लिया और उन्हें अपने घर जाने को कहा.

आसाराम ने जब घर लौटने के लिए मोती कोरल से ट्रेन पकड़ी तो उनके मन में आध्यात्मिक साधना चल रही थी. इसलिए उन्होंने नर्मदा नदी के तट पर ध्यान करना शुरू किया. वहां वे एक संत श्री लालजी महाराज से प्रभावित हुए. और उन संत ने आसाराम के लिए अपने रामनिवास के दत्त कुटीर में उनके लिए रहने की व्यवस्था करवाई और वही पर आसाराम 40 दिनों की साधना की.

जब आसाराम की पत्नी और मां को पता चला कि आसाराम मोती कोरल के एक आश्रम में है, तो वे दोनों उससे मिलने गईं और घर लौटने का अनुरोध किया. तो उन्होंने अपनी माँ और पत्नी को कहा कि वह अपनी पूरी साधना के बाद ही घर लौटेंगे. इसके बाद 40 दिन की साधना पूरी होने के बाद लालजी महाराज अपने गांव वालों के साथ आसाराम को स्टेशन पर छोड़ने चले गए.

आसाराम ट्रेन में बैठकर मोती कोरल से निकलकर मियागांव स्टेशन पहुंचे तभी वह ट्रेन से कूद गए और मुंबई के लिए दूसरी ट्रेन पकड़ी जहाँ वे स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज से मिलने गए. महाराज जी आसाराम से मिलकर अधिक प्रफुल्लित हुए.

संवत 2021 आश्विन मास शुक्ल पक्ष द्वितीया यानि 7 अक्टूबर 1964 बुधवार के दिन लीलाशाह महाराज की कृपा से आसुमल से संत श्री आशारामजी बापू हुए. इसके बाद आसाराम अगले दो दिनों के लिए समाधि में चले गए.

श्री लीलाशाहजी महाराज ने आसाराम को घर में रहकर मानवता की भलाई के लिए कार्य करने का आदेश दिया। अगले 7 साल तक आसाराम सेल्फ डिस्कवरी में अकेले रहे. आश्रम में कोई भक्त उनके प्रवचन सुनने आता था तो उन्होंने ही आसाराम को बापू कहकर संबोधित करना शुरू किया. बापू ने दिसा, हिमालय, माउंट आबू और नरेश्वर धाम जैसे स्थानों पर अकेले ध्यान किया.

आसाराम को साबरमती के किनारे मोटेरा गाँव में एक शांत जगह मिली जहाँ उनके भक्तों ने बाद में एक छोटा कमरा बना लिया. जिसे मोक्ष कुटीर के नाम से जाना जाने लगा. और धीरे-धीरे मोटेरा गाँव में आने वाले भक्तों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई और एक छोटा सा स्थान एक बड़ा आध्यात्मिक स्थल बन गया।

आसाराम  पर लगे आरोप (Asaram Bapu Controversy)

आसाराम के बुरे दिन साल 2008 के बाद शुरू हुए जब अहमदाबाद में उनके एक आश्रम के स्कूल के 2 छात्रों की लाश साबरमती नदी में मिली थी. आसाराम पर तांत्रिक होने का आरोप लगाया गया और इसी के चलते उसने उन दोनों छात्रों की हत्या करवा दी. इन पर आरोप तो साबित नही लिया लेकिन यही से आसाराम के पतन की शुरुआत हो चुकी थी. और उस समय तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया था.

अगस्त 2013 में, उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग लड़की और उसके परिवार ने आसाराम के खिलाफ दिल्ली पुलिस में बलात्कार के लिए जीरो एफआइआर दर्ज की थी. उसमे बताया गया था कि आसाराम ने जोधपुर स्थित अपने एक आश्रम 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का रेप किया था. दिल्ली पुलिस ने यह एफआइआर केस जोधपुर ट्रांसफर कर दी. लड़की का मेडिकल के बाद आसाराम को गिरफ्तार किया. इसके बाद आसाराम का मेडिकल कराया गया। जांच में पता चला कि आसाराम शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम है. 25 अप्रैल 2018 को विशेष अदालत ने आसाराम को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 342, 506 और 509 और पोस्को अधिनियम की धारा 8 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 और 26 के तहत मामला दर्ज किया गया है. आसाराम फिलहाल जोधपुर कारावास में बंद है और जमानत के लिए कोर्ट में अपील कर रहे है.

आसाराम बापू की संपत्ति  (Asaram Bapu Net worth)

आयकर विभाग ने जून 2016 में आसाराम की तकरीबन 2300 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा किया था. उस समय बाबा के 400 आश्रम चल रहे थे. बाबा की कमाई का मुख्य जरिया अध्यात्म और जनसेवा पर आधारित पत्रिकाएं होती थीं, जो हर साल करोड़ों का मुनाफा देती थीं. इसके अलावा बाबा के कई उत्पाद बिकते हैं, जिनमें गोमूत्र, अगरबत्ती, आयुर्वेदिक दवाएं, शैंपू और साबुन और अन्य उत्पाद (asaram bapu products) शामिल हैं. इनसे बाबा की करोड़ो की कमाई हो जाती है. बाबा हर साल गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु दक्षिणा का कार्यक्रम आयोजित करते थे, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिससे बाबा की अच्छी खासी कमाई हो जाती थी.

निष्कर्ष :- तो आज के इस लेख में आपने जाना आसाराम बापू का जीवन परिचय (Asaram Bapu Biography in hindi) के बारे में. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आयी होगी. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आयी होगी. उम्मीद करते है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी. अगर आपका कोई सुझाव है तो कमेंट करके जरूर बताइए. अगर आपको लेख अच्छा लगा हो तो रेटिंग देकर हमें प्रोत्साहित करें.

FAQ

Q : आसाराम बापू का असली नाम क्या है
Ans : आसुमल थाउमल सिरुमलानी हरपलानी

Q : आसाराम बापू का जन्म कहां हुआ था
Ans : नवाबशाह, सिंध प्रान्त, पाकिस्तान

Q : आसाराम बापू का जन्म कब हुआ
Ans : 17 अप्रैल 1941

Q : आसाराम बापू के गुरु कौन थे
Ans : लीलाधर शाह

Q : आसाराम बापू कहां है
Ans : जोधपुर जेल में

Q : आसाराम बापू कौन सी जेल में
Ans : जोधपुर जेल में

Q : आसाराम बापू को जेल कब हुई
Ans : 31 अगस्त 2013

Q : आसाराम बापू को कितने साल की सजा हुई है
Ans : आजीवन कारावास

Q : आसाराम बापू पर केस कब हुआ?
Ans : अगस्त 2013

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