Metaverse Kya Hai In Hindi | मेटावर्स क्या है और यह कैसे काम करता है?

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आज के समय में सभी क्षेत्र को आगे बढ़ाने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अहम योगदान रहा है. इस युग में सोशल मीडिया को इस्तेमाल करना सभी के रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो गया है. इन्ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में से एक है फेसबुक. फेसबुक पर आप सभी के अकाउंट तो जरुर होंगे इसके माध्यम से आप अपने परिवारजन, रिश्तेदार, मित्र और चाहनेवालो के सम्पर्क में बने रहते है. यहाँ तक इससे कई लोग पैसा भी कमा रहे है. अब तो फेसबुक की आदत बच्चों के डायपर की तरह हो गई है हर 2 मिनट में फेसबुक खोल कर चेक करना पड़ता है कि किसी ने कोई पोस्ट, फोटो या फिर की स्टेट्स शेयर तो नही किया. लेकिन अभी कुछ दिनों पहले फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने सोशल मीडिया के जरिये इस बात की जानकरी दी है कि वो फेसबुक का नाम बदलने जा रहे है, और फेसबुक का नया नाम मेटा होगा जिसे मेटावर्स शब्द से लिया हुआ है. तो आज के इस लेख में हम आपको बताएँगे कि मेटावर्स क्या है और यह कैसे काम करता है? (Metaverse Kya Hai In Hindi) और फेसबुक नाम बदलने की पीछे की वजह क्या है.

Metaverse

मेटावर्स क्या है? (Metaverse Kya Hai)

मेटावर्स फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग द्वारा बनाया गया एक वर्चुअल प्लेटफॉर्म है. इस सोशल प्लेटफार्म के जरिये सब कुछ हकीकत में बदला जा सकता है यू कहे तो इसमें एडवांस्ड लेवल की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इस वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिये आप काल्पनिक दुनिया को वस्तिकता में तब्दील सकते हो. मेटावर्स एक ऐसी वर्चुअल दुनिया बना देगा कि आप एक जगह रहते हुए पूरी दुनिया में कई भी घूम सकते हो. इसके अलावा आप गेम खेल सकते हो, पढाई कर सकते हो, शोपिंग कर सकते हो और अपनी फॅमिली के साथ ट्रिप का आनंद उठा सकते हो. इसके लिए आपको ना कोई पैसो की आवश्यकता है और ना ही कही जाने की जरुरत.

मेटावर्स का इतिहास (Metaverse History)

जब से फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक का नाम बदलकर मेटा (Meta) रखा है तभी से यह शब्द चर्चाओ का केंद्र बना हुआ है. आपको बता दूँ हमारे लिए मेटा शब्द नया होगा लेकिन यह काफी पुराना शब्द है जिसे पहली बार साल 1992 में सुना गया था. अमेरिकन डायस्टोपियन साइंस फिक्शन लेखक नील स्टीफेंसन के द्वारा लिखी गई नावेल “स्नो क्रैश” में से लिया हुआ शब्द है. इस नावेल में मेटावर्स का मतलब एक बाहरी दुनिया से था जो असल में बिलकुल अलग है. लोग अपने घरो में बैठकर विडियो गेम के जरिये हेडफोन और वर्चुअल रियलिटी की सहायता से कनेक्ट होकर बाहरी दुनिया का मज़ा ले सकते है. दरअसल साल 2003 में एक गेम “सेकेंड लाइफ” आया था जिसे मेटावर्स की तर्ज पर बनाया गया एक ऑनलाइन गेम है जिसमे लोग एक दुसरे के लिए अलग तरह की दुनिया बनाते थे और उसमे जीवन जीने के साथ एक दुसरे से बातचीत करते थे. इस गेम में चीज़े ख़रीदा और बेचा भी जाता था.

क्यों बदलना पड़ गया फेसबुक नाम (Why Facebook Changed Its Name To Meta)

फेसबुक के नाम बदलने के पीछे की वजह यह है कि जब मार्क जुकरबर्ग की कम्पनी पर यूजर के डेटा को लीक करने के कई गंभीर आरोप लगे थे. बताया जाता है कि फेसबुक की पूर्व डेटा इंजिनियर ने कंपनी के कुछ गोपनीय दस्तावेज लीक कर दिए थे. जिससे फेसबुक ने अपने फायदे के लिए यूजर की सेफ्टी का बिलकुल ध्यान नही रखा. लेकिन मार्क जुकरबर्ग ने इन सभी बातों को निराधार बताया और फेसबुक का नाम बदलने के बारे में सोचा. उनका विज़न था कि सेफ्टी का पूरा ध्यान रखने के अलावा यूजर को वर्चुअल दुनिया का भी अनुभव हो. फेसबुक का नाम मेटा में बलदने का सुझाव फेसबुक के पूर्व सिविक इंटीग्रिटी अधिकारी समिध चक्रवर्ती ने दिया था. मार्क जुकरबर्ग को यह नाम काफी प्रभावित लगा क्यों कि खुद मार्क पहले से ही वर्चुअल रियलिटी एवं ऑगमेंटेड रियलिटी में इन्वेस्ट कर चुके थे. तो ऐसे में उन्होंने फेसबुक का नाम बदलकर मेटा रखा दिया है.

कहां से आया मेटावर्स शब्द (Metaverse Digital World)

मेटावर्स शब्द का जिक्र साल 1992 में अमेरिकन लेखक नील स्टीफैंसन ने अपने साइंस फिक्शन उपन्यास “स्नो क्रश” में किया हुआ था. इन उपन्यास में उन्होंने बताया था कि किस तरह दुनिया बदल जाएगी और आप वर्चुअल वर्ल्ड में वो सभी कर पाओगे जो असल जिंदगी में कर पाना मुश्किल है.

कैसे बनता है मेटावर्स (How to build the Metaverse)  

मेटावर्स का निर्माण कई अलग-अलग टेक्नोलॉजी के जरिये किया जा रहा है. जिसमे होलोलेंस और अवतार के रूप में दिखाया जायेगा. फ़िलहाल ये सभी कार्टून कैरेक्टर के जैसे दिखेंगे लेकिन इन पर भी कार्य किया जा रहा है कुछ सालो बाद हुबहू इंसान की तरह दिखने लगेंगे. वर्चुअल रियलिटी हेडसेट के माध्यम से अवतार के कैरेक्टर को और होलोलेंस के जरिये होलोग्राम दिखाया जायेगा. दरअसल मेटावर्स वर्चुअल रियलिटी (Virtual Reality) और ऑग्मेंटेड रियलिटी (Augmented Reality) से मिलकर बना होता है. वर्चुअल रियलिटी में VR हैडफ़ोन पहनना होता है जिसके बाद आपको एक अलग ही दुनिया का अनुभव होगा. ऑग्मेंटेड रियलिटी में आपके आसपास का माहौल डिजिटल वर्ल्ड में बदल जायेगा, जो दिखने में बिलकुल असल दुनिया जैसे होगा. अगर आपने साल 2016 में लांच हुआ गेम Pokemon Go खेला होगा तो ये बिलकुल उसके जैसा होगा. आपको बता दूँ होलोलेंस टेक्नोलॉजी पर माइक्रोसॉफ्ट काम कर रही है और  VR हैडफ़ोन को फेसबुक और ऐपल जैसी बड़ी कंपनियां बना रही है.

मेटावर्स रियल लाइफ में कैसा दिखेगा (Metaverse Looks Like Real Life)

मेटावर्स एक वर्चुअली दुनिया है यहाँ पर सभी अवतार 3D टेक्नोलॉजी के जरिये एक-दुसरे से संवाद कर सकेंगे. इस टेक्नोलॉजी की मदद से वर्चुअली वर्ल्ड रियल लाइफ जैसी दिखेगी. इसमें आप शॉपिंग, पढाई, घूमना, जमीन खरीदना और शादी जैसे काम कर सकते हो. कुछ दिनों पहले तमिलनाडु में पहली बार एक कपल ने मेटावर्स शादी की. इस समारोह में सभी गेस्ट भारत के अलग-अलग जगह से वर्चुअल रियलिटी हैडफ़ोन पहना जिससे उन सभी के अवतार क्रिएट हो गए और शादी में शामिल हो गए. और सिंगर दलेर मेहंदी ने भी मेटावर्स के मदद से लाइव म्यूजिकल इवेंट किया. यह आपको रियल लाइफ एक्सपीरिएंस कराएगा.

कैसे काम करेगा मेटावर्स (How Do Metaverse Work)

मेटावर्स एक 3D टेक्नोलॉजी होने के चलते सॉफ्टवेयर के जरिये कार्य करेगा. इस सॉफ्टवेयर को रन कराने के लिए हाई कॉन्फ़िगरेशन वाले सीपीयू की आवश्यकता होगी और बहुत ज्यादा हार्डवेयर का उपयोग होगा. इसके जरिये अवतार को बनाने में 360 डिग्री स्कैनिंग की जाएगी. मेटावर्स हाई-स्पीड इंटरनेट, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर निर्भर होगा. मेटावर्स में अगर कुछ भी खरीदना या बेचना है तो क्रिप्टोकरेंसी के जरिये यह किया जा सकता है.

कब तक आएगा मेटावर्स (When Is The Metaverse Coming)

मेटावर्स अभी शुरूआती स्टेज पर है. इसको पूरी तरह से बनने में तक़रीबन 10 से 15 सालो का समय लगेगा. मेटावर्स अलग अलग चरणों में बनना शुरू हो रहा है. बताया जाता है कि इसे बनाने के लिए कई दिग्गज कंपनिया मिलकर कार्य कर रही है. इसमें अलग अलग तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा जिसमे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तो होंगे ही इसके अलावा इंटरफेस क्रिएशन, एसेट क्रिएशन, फाइनेंशियल और प्रोडक्ट सर्विसेस जैसी कई डिपार्टमेंट होंगे. इनमे फेसबुक, एप्पल, गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट और स्नेपचैट जैसी कंपनियां मेटावर्स बनाने में लगी हुई है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो वर्ष 2035 तक मेटावर्स की इंडस्ट्री लगभग 74.8 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी.

मेटावर्स से लाभ (Metaverse Benefit)

  1. मेटावर्स की मदद से आप घर बैठें अपने रिश्तेदार, दोस्त और परिवार से वर्चुअली जुड़कर ऐसा अनुभव करेंगे मानों आप उनके साथ वास्तव में बैठे हो.
  2. मेटावर्स में हम अपने 3D अवतार के लिए कपड़े, जूते, चश्मा खरीद सकेंगे. यहाँ तक कि आप अपने अवतार के बाल भी कटवा सकते हो. इन सभी का पेमेंट क्रिप्टोकरेंसी के जरिये होगा.
  3. मेटावर्स के जरिये आप किसी भी होटल में जाने से पहले अवतार के जरिये रूम का एक्सपीरिएंस कर पायेंगे.
  4. इसमें लाइव शो कर सकते हो, अभी हाल ही में पंजाबी सिंगर दलेर मेंहदी ने मेटावर्स में खुद की ज़मीन खरीदी है, और जिसका नाम दिया है बल्ले-बल्ले लैंड. और इसी के जरिये एक लाइव शो भी किया था जिसमे पब्लिक अपने अवतार के जरिये शो में भाग लिया था.
  5. मेटावर्स में शॉपिंग कर सकते हो, आप अपने अवतार को कपड़े, जूते पहनकर देख सकते हो. पसंद आये तो क्रिप्टोकरेंसी की मदद से पेमेंट कर दो और कुछ दिनों में रियल लाइफ में आपके घर पर डिलीवर हो जायेगा.

मेटावर्स से नुकसान (Metaverse Side Effects)

  1. मेटावर्स से हमारा सोचने का तरीका अलग हो जायेगा, साधारण काम भी कठिन हो जायेगा.
  2. सोशल मीडिया से हमारी प्राइवेसी के लीक होने का खतरा बढ़ा है, लेकिन मेटावर्स से हमारी बॉडी के सारे मूवमेंट खाना-पीना, रेटिना, फिंगरप्रिंट, हर्ट रेट जैसी पर्सनल डिटेल का लीक होने का खतरा बना रहेगा.
  3. आज कल लोग ऐसे ही दुनिया से दूर रहते है और सोशल मीडिया में लगे रहते है. मेटावर्स के आने के बाद दुनिया से कॉन्टैक्ट खत्म हो जायेगा.
  4. अकेलेपन की समस्या अधिक हो जाएगी और फेस टू फेस अपनी संवेदना प्रकट नही कर पायेगे.
  5. दिन भर VR हैडफ़ोन और भी कई तरह के गैजेट बॉडी पर पहनने से हमारे शरीर को काफी हानि होगी, स्वस्थ ख़राब रहेगा, आँखों में समस्या रहेगी.

निष्कर्ष – मेटावर्स के आने के बाद हमारी ज़िंदगी के कुछ काम आसान तो कुछ काम कठिन हो जायेंगे। हम एडवांस टेक्नोलॉजी भरी लाइफ में तो रहेंगे लेकिन समाज से दूर हो जायेंगे। तो आज के इस लेख में हम आपको बताया कि मेटावर्स क्या है और यह कैसे काम करता है? (Metaverse Kya Hai In Hindi) उम्मीद करते है आपको यह जानकरी पसंद आई होगी.

FAQ

Q : क्या फेसबुक को अब मेटा कहा जाएगा?
Ans : हा

Q : क्या फेसबुक का कोई नया नाम है?
Ans : मेटा

Q : क्या फेसबुक को अब मेटा कहा जाएगा?
Ans : फ़िलहाल फेसबुक का नाम नही बदला है.

Q : कब फेसबुक का नाम बदलकर मेटा रखा दिया गया ?
Ans : 28 अक्टूबर 2021

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मेरा नाम अशोक जांगिड है. मैं जयपुर राजस्थान में रहता हूँ. मुझे कई सालो का ब्लॉग्गिंग का अनुभव है.

1 COMMENT

  1. metaverse technology की पूरी जानकारी आपने के ही लेख में दे दिया है। इस लेख को पढने के बाद मुझे metaverse के बारे में आसानी से समझ आ गया।

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